-हल्का, पारदर्शी और सुरक्षित माने जाने वाले कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर की मांग बढ़ी नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत में घरेलू रसोई में खाना बनाने के लिए सबसे अधिक उपयोग एलपीजी गैस सिलेंडर का होता है। आमतौर पर घरों में लाल रंग का लोहे का सिलेंडर देखने को मिलता है, लेकिन अब गैस कंपनियों ने एक नया विकल्प बाजार में उतारा है, जिसे फाइबर या कंपोजिट गैस सिलेंडर कहा जाता है। हल्का और पारदर्शी होने के कारण यह सिलेंडर धीरे-धीरे लोगों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। फाइबर गैस सिलेंडर को कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर या एक्स्ट्रालाइट सिलेंडर भी कहा जाता है। इसे स्टील की जगह फाइबर और प्लास्टिक कंपोजिट मटेरियल से बनाया जाता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह थोड़ा पारदर्शी होता है, जिससे बाहर से ही देखा जा सकता है कि अंदर कितनी गैस बची हुई है। हल्का होने के कारण इसे उठाना और रखना भी आसान होता है। भारत में इस तरह के सिलेंडर की शुरुआत इंडियन ऑयल कार्पोरेशन के इन्डेन ब्रांड के तहत की गई है। फाइबर गैस सिलेंडर की कीमत शहर के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है। आम तौर पर सामान्य दिनों में 10 किलो के फाइबर सिलेंडर में गैस भरवाने की कीमत करीब 750 से 900 रुपये तक होती है, जबकि इसका सिक्योरिटी डिपॉजिट लगभग 3000 से 3500 रुपये तक हो सकता है। वहीं 5 किलो के फाइबर सिलेंडर की गैस कीमत लगभग 400 से 500 रुपये और सिक्योरिटी डिपॉजिट करीब 2000 से 2500 रुपये तक होता है। दूसरी ओर, भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला 14.2 किलो का पारंपरिक लाल रंग का लोहे का सिलेंडर है। इसकी गैस रिफिल की कीमत शहर के अनुसार लगभग 900 से 1100 रुपये के बीच रहती है, जबकि इसका सिक्योरिटी डिपॉजिट करीब 2000 से 2200 रुपये तक होता है। हालांकि फाइबर सिलेंडर का शुरुआती डिपॉजिट लोहे के सिलेंडर से थोड़ा ज्यादा हो सकता है, लेकिन इसका हल्का वजन, पारदर्शिता और आधुनिक डिजाइन इसे कई उपभोक्ताओं के लिए आकर्षक विकल्प बन गया है। अनुमान है कि समय के साथ ही धीरे-धीरे इसकी मांग भी बढ़ेगी। हिदायत/ईएमएस 12 मार्च 2026