लेख
12-Mar-2026
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दक्षिण,दक्कन और पूर्वी भारत को जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक कदम,रेल सेवाओं तक सीमित नहीं रहा। इस अवसर पर उन्होंने लगभग 5,650 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजना ओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। इनमें रेलवे,ऊर्जा,पेट्रोलियम अवसंरचना,ग्रामीण सड़क संपर्क और औद्योगिक विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएँ शामिल हैं। भारतीय रेल केवल पटरियों पर दौड़ती हुई धातु की गाड़ियाँ नहीं है। वह भारत की अर्थव्यवस्था, समाज और सांस्कृतिक संपर्क का सबसे बड़ा सेतु है। इस विशाल देश में जहाँ भौगोलिक दूरियाँ अनेक बार लोगों, बाजारों और अवसरों के बीच दूरी पैदा कर देती हैं,वहाँ रेल व्यवस्था उन्हें जोड़ने वाली जीवनरेखा का कार्य करती है। जब भी कोई नई रेल सेवा शुरू होती है,तो वह केवल एक परिवहन सुविधा का विस्तार नहीं होती,बल्कि लाखों लोगों के जीवन में नई संभावनाओं का द्वार खोलती है। तमिलनाडु के ऐतिहासिक नगर तिरुचिरापल्ली ने आज ऐसा ही एक महत्वपूर्ण क्षण देखा,जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अमृत भारत एक्सप्रेस,दो एक्सप्रेस रेलगाड़ियों और एक यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही केरल के एर्णाकुलम से एक और पैसेंजर ट्रेन सेवा भी शुरू की गई। इन रेल सेवाओं के आरंभ के साथ दक्षिण भारत,दक्कन और पूर्वी भारत के बीच संपर्क का एक नया अध्याय खुल गया है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा का महत्व केवल रेल सेवाओं तक सीमित नहीं रहा। इस अवसर पर उन्होंने लगभग 5,650 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। इन परियोजनाओं में रेलवे, ऊर्जा,पेट्रोलियम अवसंरचना, ग्रामीण सड़क संपर्क और औद्योगिक विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएँ शामिल हैं। यह पूरा कार्यक्रम इस बात का संकेत देता है कि आधुनिक भारत का विकास अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रह सकता,बल्कि उसे देश के हर क्षेत्र तक समान रूप से पहुँचना होगा। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारतीय रेल केवल परिवहन का साधन नहीं है,बल्कि यह देश की प्रगति और सामाजिक एकता की महत्वपूर्ण धुरी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि पिछले वर्षों में रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण, नई ट्रेनों की शुरुआत,स्टेशन पुनर्विकास और रेलवे लाइनों के विद्युतीकरण जैसे कदमों ने यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान की है। उनके अनुसार विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब देश के छोटे-छोटे शहर और कस्बे भी मजबूत परिवहन नेटवर्क से जुड़ेंगे। इस संदर्भ में पोदानूर-धनबाद अमृत भारत एक्सप्रेस की शुरुआत एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। दक्षिण भारत का औद्योगिक शहर कोयंबटूर लंबे समय से देश के प्रमुख विनिर्माण केंद्रों में गिना जाता है। कपड़ा उद्योग,मशीन टूल्स,पंप निर्माण और छोटे-मध्यम उद्योगों की विशाल श्रृंखला ने इस शहर को दक्षिण भारत की औद्योगिक राजधानी जैसा स्थान दिलाया है। यहाँ के कारखानों की मशीनों की निरंतर आवाज़ केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था का संकेत नहीं है, बल्कि यह भारत के औद्योगिक तंत्र की धड़कन भी है। फिर भी एक विडंबना लंबे समय से बनी हुई थी कि इतना बड़ा औद्योगिक केंद्र होने के बावजूद कोयंबटूर का पूर्वी भारत के खनिज और ऊर्जा क्षेत्र से सीधा रेल संपर्क नहीं था। अब यह स्थिति बदल गई है। पोदानूर से धनबाद तक चलने वाली अमृत भारत एक्सप्रेस पहली बार दक्षिण भारत के इस औद्योगिक क्षेत्र को झारखंड के कोयला और इस्पात क्षेत्र से सीधे जोड़ती है। पोदानूर जंक्शन कोयंबटूर का दूसरा प्रमुख रेलवे केंद्र है और यही इस नई ट्रेन का प्रारंभिक स्टेशन है। इसके कुछ ही समय बाद यह कोयंबटूर जंक्शन पहुँचती है, जिससे यात्रियों को इस सेवा का लाभ लेने के लिए दो प्रमुख स्टेशन उपलब्ध हो जाते हैं। पहले कोयंबटूर या तिरुप्पुर से झारखंड और पूर्वी भारत जाने वाले यात्रियों को चेन्नई,विजयवाड़ा या अन्य बड़े जंक्शनों पर ट्रेन बदलनी पड़ती थी। इससे यात्रा लंबी,जटिल और थकाऊ हो जाती थी। नई अमृत भारत एक्सप्रेस इस व्यवस्था को सरल और सुगम बनाती है। यह ट्रेन अपने मार्ग में सेलम, रेनिगुंटा,विजयवाड़ा,झारसुगुड़ा और राँची जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों से होकर गुजरती है। इस प्रकार यह रेल सेवा केवल दो शहरों को नहीं जोड़ती,बल्कि दक्षिण भारत के औद्योगिक गलियारे और पूर्वी भारत की ऊर्जा पट्टी के बीच एक नया आर्थिक सेतु स्थापित करती है। कोयंबटूर और तिरुप्पुर की पहचान केवल उद्योगों से नहीं है। यह क्षेत्र देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले लाखों प्रवासी श्रमिकों का भी प्रमुख केंद्र है। झारखंड,बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से हजारों युवा रोज़गार की तलाश में यहाँ आते हैं और करघों,कारखानों तथा निर्माण स्थलों पर काम करते हैं। उनके श्रम से ही इस क्षेत्र की औद्योगिक मशीनरी निरंतर गतिशील बनी रहती है। इन श्रमिकों के लिए अपने घर लौटना कई बार एक कठिन निर्णय बन जाता था। दो हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी,कई बार ट्रेन बदलने की मजबूरी, भीड़ भरे प्लेटफॉर्म और अनिश्चित समय - यह सब उस यात्रा को और अधिक कठिन बना देता था जो पहले से ही भावनात्मक रूप से भारी होती है। अमृत भारत एक्सप्रेस उनके लिए घर लौटने की इस यात्रा को सरल और सुगम बनाती है। अमृत भारत एक्सप्रेस को विशेष रूप से सामान्य यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। यह पूरी तरह गैर-एसी,किफायती किराए वाली और बिना डायनामिक किराया प्रणाली वाली ट्रेन है। इसका उद्देश्य उन लोगों को बेहतर यात्रा सुविधा देना है जिनके लिए रेल ही सबसे विश्वसनीय और सुलभ साधन है। आधुनिक स्लीपर और जनरल कोच,बेहतर बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता और अपेक्षाकृत अधिक गति-ये सभी सुविधाएँ अब उन यात्रियों को भी उपलब्ध हो रही हैं जिन्हें पहले केवल प्रीमियम ट्रेनों में मिलने वाली सुविधाएँ ही मिलती थीं। दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष कोच भी इस सेवा का हिस्सा हैं, जिससे यात्रा अधिक समावेशी बनती है। दक्षिण भारत के लिए एक और महत्वपूर्ण रेल सेवा नागर कोइल-चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस के रूप में शुरू हुई है। भारत के सबसे दक्षिणी छोर कन्याकुमारी के निकट स्थित नागरकोइल लंबे समय से तीर्थयात्रियों,मछुआरों और समुद्री जीवन से जुड़े समुदायों का प्रमुख क्षेत्र रहा है। फिर भी यह क्षेत्र दक्कन के बड़े आर्थिक केंद्रों से अपेक्षाकृत दूर रहा। नागरकोइल से हैदराबाद की यात्रा अक्सर लंबी और जटिल होती थी, जिसमें कई बार ट्रेन बदलनी पड़ती थी। नई अमृत भारत एक्सप्रेस इस दूरी को कम करते हुए तमिलनाडु,आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अनेक जिलों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करती है। यह रेल सेवा विद्यार्थियों, कामगारों,व्यापारियों और तीर्थयात्रियों के लिए नई संभावनाएँ खोलती है। इसके अतिरिक्त रामेश्वरम-मंगलुरु एक्सप्रेस और तिरुनेलवेली-मंगलुरु एक्सप्रेस जैसी नई रेल सेवाएँ तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों को जोड़ती हैं। रामेश्वरम हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है और रामनाथस्वामी मंदिर के दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं। नई रेल सेवा से तीर्थयात्रियों की यात्रा और अधिक सुगम हो जाएगी। दूसरी ओर मंगलुरु कर्नाटक का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर है,जहाँ व्यापार और शिक्षा के अनेक अवसर उपलब्ध हैं। इन नई ट्रेनों से छात्रों,व्यापारियों और पेशेवरों को बेहतर संपर्क मिलेगा। क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए मयिलादुथुराई -तिरुवरूर- काराईकुडी पैसेंजर ट्रेन सेवा भी शुरू की गई है। यह सेवा कावेरी डेल्टा के कृषि प्रधान क्षेत्रों को जोड़ती है और किसानों, विद्यार्थियों तथा स्थानीय व्यापारियों के लिए दैनिक आवा गमन को सरल बनाती है। इसी प्रकार पालक्काड-पोल्लाची पैसेंजर सेवा तमिलनाडु और केरल के सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच संपर्क को और मजबूत करती है। रेल सेवाओं के विस्तार के साथ- साथ आधारभूत ढाँचे का आधुनिकी करण भी किया जा रहा है। केरल में शोरनूर,कुट्टिप्पुरम और चंगनास्सेरी रेलवे स्टेशनों को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित किया गया है। आधुनिक प्लेटफॉर्म,लिफ्ट, एस्केलेटर,बेहतर प्रतीक्षालय और मुफ्त वाई-फाई जैसी सुविधाओं से युक्त ये स्टेशन आधुनिक भारत के नए रेलवे ढाँचे का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इसके साथ ही शोरनूर- निलांबुर रेलवे लाइन के विद्युती करण को भी राष्ट्र को समर्पित किया गया है। लगभग 65 किलोमीटर लंबी इस परियोजना से डीज़ल इंजनों पर निर्भरता कम होगी,यात्रा समय घटेगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। रेल परियोजनाओं के अतिरिक्त प्रधानमंत्री ने ऊर्जा और आधारभूत संरचना से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं का भी शुभारंभ किया। नीलगिरि और इरोड जिलों में सिटी गैस वितरण नेटवर्क,चेन्नई के मनाली क्षेत्र में इंडियन ऑयल का ल्यूब ब्लेंडिंग प्लांट और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत ग्रामीण सड़कों का निर्माण जैसी परियोजनाएँ क्षेत्रीय विकास को नई गति प्रदान करेंगी। अमृत भारत एक्सप्रेस भारतीय रेल की नई पीढ़ी की ट्रेनों में से एक है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत बनाए गए इन रेकों में आधुनिक डिजाइन और मजबूत संरचना का संयोजन है। श-पुल लोकोमोटिव प्रणाली के कारण ये ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रति घंटे तक की गति प्राप्त कर सकती हैं। विगत जनवरी 2024 में पहली अमृत भारत एक्सप्रेस शुरू होने के बाद से यह नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहा है। नई सेवाओं के शुरू होने के बाद देश में इन ट्रेनों की संख्या बढ़कर 58 हो गई है। रेलवे की पटरियाँ केवल ट्रेनों को नहीं ढोतीं, वे सपनों और उम्मीदों को भी आगे ले जाती हैं। किसी मजदूर के लिए यह घर लौटने का रास्ता है,किसी छात्र के लिए शिक्षा तक पहुँच का माध्यम और किसी उद्योग के लिए व्यापार की नई संभावनाएँ। तिरुचिरापल्ली से शुरू हुई ये नई रेल सेवाएँ और विकास परियोजनाएँ इसी व्यापक सोच का हिस्सा हैं - एक ऐसा भारत जहाँ दूरी अवसरों की सीमा न बने और देश का हर क्षेत्र विकास की समान गति से आगे बढ़ सके। जब हरी झंडी लहराई और इंजन की सीटी के साथ ट्रेनें आगे बढ़ीं, तब वह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था। इसके शाथ उस यात्रा की शुरुआत थी, जिसमें भारत के अलग -अलग हिस्से पहले से अधिक मजबूती से एक-दूसरे से जुड़ते जा रहे हैं-पटरियों,सड़कों और ऊर्जा अवसंरचना के उस विस्तृत जाल के माध्यम से आधुनिक भारत के विकास की नित्य नई कहानी लिख रहा है। (स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार) ईएमएस/ 12 मार्च 26