लखनऊ (ईएमएस)। उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक नई ‘चतुरंगिणी’ व्यवस्था बनाने का ऐलान किया। यह घोषणा उन्होंने कांशीराम स्मृति उपवन में 40 दिन चली गौ प्रतिष्ठार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के समापन के मौके पर की। शंकराचार्य ने कहा कि संत समाज गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेगा और बताएगा कि जो लोग गाय की रक्षा के पक्ष में खड़े हैं, जनता को उनका समर्थन करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान किसी राजनीतिक दल के समर्थन के लिए नहीं होगा, बल्कि लोगों को तथ्यों और धर्म के आधार पर जागरूक करने का प्रयास होगा। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित ‘चतुरंगिणी’ व्यवस्था चार वर्गों से मिलकर बनेगी—सन्यासी, वैरागी, उदासीन और सामान्य अनुयायी। इस व्यवस्था का उद्देश्य गो-संरक्षण और धर्म-संस्कृति की रक्षा के लिए संगठित रूप से कार्य करना है। साथ ही इसमें शामिल होने वाले हर व्यक्ति का पुलिस सत्यापन भी कराया जाएगा, ताकि किसी प्रकार की गलत गतिविधि या अवांछित तत्वों की भागीदारी न हो सके। शंकराचार्य ने बताया कि यात्रा के समापन के बाद अब 52 दिन तक ‘ज्ञान यज्ञ’ आयोजित किया जाएगा। इसमें संत समाज गांव-गांव जाकर लोगों को धर्म, सत्य और संस्कृति का संदेश देगा। इसके बाद 81 दिनों की ‘गविष्ठि परिक्रमा यात्रा’ निकाली जाएगी, जो 3 मई को गोरखपुर से शुरू होकर 23 जुलाई को वहीं समाप्त होगी। 24 जुलाई को संत और अनुयायी फिर से लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में एकत्र होने वाले है। कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने सरकार पर भी सवाल उठाकर कहा कि गो-संरक्षण के लिए बजट बड़ा रखा गया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं देते। उन्होंने कहा कि संत समाज राजनीति नहीं करता, लेकिन जब शासक गलत दिशा में जाता है तो उसे सही मार्ग दिखाना संतों का कर्तव्य होता है। इस कार्यक्रम में कई राजनीतिक नेता भी पहुंचे, जिनमें अजय राय और रविदास मेहरोत्रा सहित अन्य नेता शामिल थे। हालांकि बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद के बावजूद कार्यक्रम में अपेक्षाकृत कम भीड़ दिखाई दी और पंडाल में कई कुर्सियां खाली रहीं। आशीष दुबे /12 मार्च 2026