राष्ट्रीय
12-Mar-2026


भारत की जनसंख्या 2050 तक तेजी से बूढ़ी होगी नई दिल्ली (ईएमएस)। देश कम फर्टिलिटी दर को लेकर परेशान है। इसका बड़ा कारण है कि भारत की जनसंख्या 2050 तक तेजी से बूढ़ी होगी। तब 60 साल से अधिक उम्र वालों की तादाद कुल जनसंख्या का लगभग 20 प्रतिशत होगा है। आजादी के 100वें साल तक देश में बच्चों से ज्यादा बुजुर्ग हो जाएंगे। सबसे बड़ी चुनौती सिक्किम में है। वहां जापान से भी बच्चे कम पैदा हो रहे हैं। सरकार करीब 4 बरस से प्रयास कर रही है, पर हालात नहीं सुधर रहे। देश की कुल जन्म दर (टीएफआर) 2.1 के स्थिर स्तर के मुकाबले 1.9–2.0 के बीच है, जबकि सिक्किम में यह बेहद निचले स्तर 1.1 तक पहुंच गई है। इसका मतलब है कि औसतन हर महिला 1.1 बच्चे को जन्म दे रही है। 2005-06 में यह 2.0 थी, 2015-16 में 1.2 और 2025-26 में 1.1 तक आ गई। इस गिरावट के चलते सिक्किम का हाल जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से भी गंभीर हो गया है। अब सरकार नैशनल रिसर्च इंस्टीट्यूशन के साथ साझेदारी कर यह समझने की कोशिश कर रही है कि फर्टिलिटी क्यों कम हो रही है। सिक्किम जैसी स्थिति दुनिया के कई देशों की है। इसके बाद सिक्किम सरकार ने जन्म दर बढ़ाने के लिए कई प्रयास किए हैं। 2022 में शुरू की गई वात्सल्य योजना के तहत बांझपन जैसी समस्याओं से जूझ रहे दंपतियों को आईवीएफ जैसे महंगे उपचार के लिए 3 लाख रुपये की मदद दी गई। योजना शुरू होने के बाद 38 महिलाओं ने पंजीकरण कराया, जिससे स्पष्ट हुआ कि स्वास्थ्य कारण भी टीआरएफ घटने में योगदान दे रहे हैं। इतना ही नहीं सिकिम्म सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन नीति भी लागू की गई। दूसरे बच्चे पर वेतन वृद्धि, तीसरे बच्चे पर अतिरिक्त वेतन, महिला कर्मचारियों के लिए एक साल की मैटरनिटी लीव और पुरुषों को पैटरनिटी लीव दी गई। बच्चों की देखभाल के लिए अटेंडेंट की व्यवस्था की गई। निजी क्षेत्र में भी महिलाओं को दूसरे बच्चे पर 5,000 रुपये और तीसरे बच्चे पर 10,000 रुपये मासिक वित्तीय सहायता का प्रावधान है। विश्व स्तर पर भी जन्म दर बढ़ाने की चुनौतियां आम हैं। सिंगापुर में टीआरएफ 1.0 के आसपास है, जबकि दक्षिण कोरिया में यह 0.7 तक गिर गई। इन देशों में लंबे समय से बेबी बोनस, टैक्स रिबेट, सस्ती चाइल्ड केयर और हाउसिंग इंसेंटिव जैसी नीतियां लागू हैं, लेकिन परिणाम सीमित रहे हैं। हंगरी को थोड़ी सफलता मिली है, जहां 2011 में टीआरएफ 1.23 था और सरकार ने हाउसिंग सब्सिडी, कम ब्याज पर कर्ज और चार या अधिक बच्चों वाली महिलाओं के लिए आयकर छूट जैसी नीतियां लागू कीं। 10 साल बाद टीआरएफ 1.5 तक बढ़ा, लेकिन यह भी रिप्लेसमेंट लेवल से कम है। जनसंख्या संतुलन बनाए रखने और बूढ़ी आबादी के बढ़ते बोझ को संभालने के लिए जन्मदर बढ़ाने के प्रयासों को और प्रभावी, समग्र और दीर्घकालिक रणनीतियों के साथ लागू करना होगा। इसके लिए स्वास्थ्य, वित्तीय प्रोत्साहन और सामाजिक समर्थन सभी आवश्यक हैं। आशीष दुबे /12 मार्च 2026