क्षेत्रीय
12-Mar-2026


सिरोंज (ईएमएस)। उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार केडीबीएम महाविद्यालय, सिरोंज में अध्ययनरत विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, कल्याण एवं आत्महत्या के बढ़ते प्रकरणों की रोकथाम के संबंध में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से “तनाव प्रबंधन” विषय पर एक प्रेरक एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल के अंतर्गत विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच विकसित करने, मानसिक संतुलन बनाए रखने तथा जीवन की चुनौतियों का धैर्य और आत्मविश्वास के साथ सामना करने के लिए जागरूकता कार्यक्रम एवं नवाचार गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में एलबीएस कॉलेज के काउंसलर नरेंद्र दांगी उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा के बढ़ते दबाव, प्रतिस्पर्धा और भविष्य की चिंताओं के कारण विद्यार्थियों में मानसिक तनाव का बढ़ना स्वाभाविक है, किंतु यदि समय रहते सही मार्गदर्शन और संतुलित जीवनशैली अपनाई जाए तो इस तनाव को सकारात्मक ऊर्जा में बदला जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को समय प्रबंधन, संतुलित दिनचर्या, सकारात्मक सोच तथा नियमित व्यायाम अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण ही जीवन की कठिन परिस्थितियों से बाहर निकलने का सबसे प्रभावी मार्ग है। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी संस्थान से पधारीं ब्रह्मचारिणी सरस्वती दीदी ने विद्यार्थियों को ध्यान (मेडिटेशन) का अभ्यास करवाया और बताया कि नियमित ध्यान एवं सकारात्मक चिंतन से मन शांत रहता है तथा तनाव को कम करने में सहायता मिलती है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रतिदिन कुछ समय आत्मचिंतन और ध्यान के लिए निकालने की प्रेरणा दी, जिससे मन में स्थिरता और एकाग्रता बढ़ती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केडीबीएम महाविद्यालय की डायरेक्टर श्वेता आनंद त्यागी ने कहा कि कई बार विद्यार्थी समय पर कार्य न करने और अनुशासित दिनचर्या का पालन न करने के कारण अनावश्यक तनाव का सामना करते हैं। उन्होंने संत कबीरदास के प्रसिद्ध दोहे “काल करे सो आज कर, आज करे सो अब; पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब” का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को समय का सदुपयोग करने और प्रत्येक कार्य को समय पर पूरा करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी इस सिद्धांत को अपने जीवन में अपनाएं, तो जीवन की अनेक समस्याएँ और उनसे उत्पन्न होने वाला तनाव स्वतः समाप्त हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों का मानसिक रूप से स्वस्थ, सकारात्मक और आत्मविश्वासी होना अत्यंत आवश्यक है तथा ऐसे कार्यक्रम उन्हें जीवन में संतुलन बनाकर आगे बढ़ने की दिशा प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य शांताराम मराठा ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने मुख्य वक्ता नरेंद्र दांगी, ब्रह्मचारिणी सरस्वती दीदी एवं सभी उपस्थित अतिथियों का महाविद्यालय परिवार की ओर से धन्यवाद ज्ञापित किया।इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकगण, स्टाफ तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे और सभी ने कार्यक्रम से महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त किया। ईएमएस / दिनांक 12/3/025