नोएडा (ईएमएस)। ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर हजारों किलोमीटर दूर भारतीय खिलौना बाजार और मैन्युफैक्चरिंग हब तक पहुंच गया है। वैश्विक अस्थिरता और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण भारतीय टॉय इंडस्ट्री की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसका नतीजा यह है कि कच्चे माल की कमी, उत्पादन लागत में बढ़ोतरी और निर्यात ऑर्डर रद्द होने से कारोबार संकट में आ गया। प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल उद्योग पर पड़े असर के कारण खिलौना निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की भारी कमी हुई है। इसके साथ ही पैकिंग सामग्री जैसे डिब्बे और फिल्में भी डेढ़ गुना तक महंगी हुई हैं। इससे उत्पादन लागत तेजी से बढ़ गई है और कई यूनिट्स को काम रोकने की नौबत आ गई है। खिलौना कारोबार से जुड़े एक शख्स ने बताया कि बीते कुछ वर्षों में वैश्विक बाजार में भारतीय खिलौनों की पकड़ मजबूत हुई थी, लेकिन मौजूदा युद्ध ने उद्योग को गहरे संकट में डाल दिया है। उनके मुताबिक करीब 60 से 70 प्रतिशत छोटी और मध्यम टॉय यूनिट्स बंद होने की कगार पर हैं। खिलौना व्यापारी के अनुसार युद्ध के कारण समुद्री मार्गों में व्यवधान आने से लॉजिस्टिक्स पर भारी असर पड़ा है। खाड़ी देशों में सप्लाई रुकने से सैकड़ों कंटेनर या बंदरगाहों पर खड़े हैं या समुद्र में ही अटके हुए हैं। इससे निर्यात पूरी तरह प्रभावित हो गया है। टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया से जुड़े एक शख्स ने बताया कि दुबई और सऊदी अरब भारतीय खिलौनों के सबसे बड़े बाजार हैं। आमतौर पर रोजाना करीब 50 कंटेनर खाड़ी देश जाते थे और एक कंटेनर की औसत कीमत करीब 20 लाख रुपये होती है। इस हिसाब से व्यापारियों को केवल निर्यात के मोर्चे पर ही रोजाना 10 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। इतना ही नहीं उत्पादन लागत बढ़ने का सीधा असर बाजार पर भी पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार खिलौनों की कीमतें 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बच्चों के पसंदीदा खिलौने खरीदना मुश्किल हो गया है। टॉय इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी सरकार को इस संकट के समय निर्यातकों के लिए विशेष राहत पैकेज और लॉजिस्टिक्स सहायता प्रदान करनी चाहिए। आशीष/ईएमएस 13 मार्च 2026