नई दिल्ली (ईएमएस)। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से हृदय रोग, नसों में अवरोध, हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं, इसलिए समय-समय पर इसकी जांच और नियंत्रण बेहद जरूरी है। यह कहना है हेल्थ विशेषज्ञों का। विशेषज्ञों के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का वसायुक्त या मोम जैसा पदार्थ होता है, जो शरीर के लिए पूरी तरह हानिकारक नहीं है। दरअसल यह शरीर में कोशिका झिल्ली, कुछ जरूरी हार्मोन और विटामिन-डी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सामान्य तौर पर कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार का होता है एलडीएल और एचडीएल। एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को खराब माना जाता है, क्योंकि यह धमनियों में जमा होकर रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। इसके विपरीत एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह शरीर में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करता है और दिल को सुरक्षित रखने में सहायक होता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के स्पष्ट और निश्चित लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि डॉक्टर नियमित रूप से ब्लड टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। हालांकि कुछ संकेत ऐसे हो सकते हैं जो इस समस्या की ओर इशारा करते हैं। इनमें जी मिचलाना, अत्यधिक थकान, सीने में दर्द या एंजाइना, सांस लेने में परेशानी, हाथ-पांव में सुन्नपन या ठंडापन, हाई ब्लड प्रेशर, पेट की गड़बड़ी और सिर की नसों में दबाव जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। चिकित्सकों के अनुसार पुरुषों को 45 से 65 वर्ष और महिलाओं को 55 से 64 वर्ष की उम्र के बीच हर एक से दो साल में कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। वहीं 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को हर साल यह जांच कराना बेहतर माना जाता है। कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली बेहद जरूरी है। आयुर्वेद में भी इसे नियंत्रित करने के कई उपाय बताए गए हैं। पारंपरिक उपचार के तौर पर भूना हुआ जीरा, मैथीदाना, धनिया, सौंफ, काली मिर्च, छोटी पीपल, सौंठ और दालचीनी को समान अनुपात में लेकर चूर्ण बनाया जाता है। इस चूर्ण को रोजाना सुबह और शाम भोजन के लगभग एक घंटे बाद गर्म पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि यह मिश्रण पाचन को बेहतर बनाने के साथ शरीर से अतिरिक्त वसा को कम करने में मदद कर सकता है और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में सहायक हो सकता है। शरीर में बढ़ता एलडीएल कोलेस्ट्रॉल कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। डॉक्टर इसे ‘खराब’ या ‘गंदा’ कोलेस्ट्रॉल मानते हैं, क्योंकि इसका स्तर अधिक होने पर दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। सुदामा/ईएमएस 14 मार्च 2026