- शहरों के पास सबसे ज्यादा बिगड़ी हालत भोपाल (ईएमएस)। प्रदेश की कई प्रमुख नदियों के कुछ हिस्सों में पानी की गुणवत्ता खराब पाई गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 18 प्रदूषित नदी खंड चिह्नित किए गए हैं। नदी खंड से आशय नदी के उस हिस्से से है, जहां पानी में जैविक प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानक से अधिक हो जाता है और उसकी गुणवत्ता सुधारने की आवश्यकता होती है। प्रदेश में कुल 18 प्रदूषित नदी खंड और स्थान चिह्नित किए गए हैं। इनमें प्रदूषण की गंभीरता के आधार पर दो खंड प्रायोरिटी-1, एक प्रायोरिटी-2, दो प्रायोरिटी-3, तीन प्रायोरिटी-4 और दस प्रायोरिटी-5 श्रेणी में आते हैं। रिपोर्ट में जिन नदियों के हिस्सों में प्रदूषण पाया गया है, उनमें प्रमुख रूप से शिप्रा, कान्ह, चंबल, बेतवा, नर्मदा, ताप्ती, कालीसिंध, पार्वती, गंभीर, तवा, सोन और केन शामिल हैं। इन नदियों के अलग-अलग शहरों और कस्बों के आसपास के हिस्सों में पानी की गुणवत्ता मानक से नीचे पाई है। शहरों के पास ज्यादा प्रदूषण रिपोर्ट का विश्लेषण बताता है कि प्रदूषण सबसे ज्यादा उन स्थानों पर है जहां शहरी दबाव अधिक है। प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, देवास, भोपाल, ग्वालियर-मुरैना, नर्मदापुरम और खंडवा-बुरहानपुर जैसे क्षेत्रों के आसपास नदी के हिस्सों में प्रदूषण दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार शहरों के नालों का पानी और बिना उपचारित सीवेज सीधे नदियों में जाने से यह स्थिति बन रही है। सीपीसीबी के राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत देश में 4736 स्थानों पर जल गुणवत्ता की निगरानी की जाती है, जिनमें 2155 स्थान नदियों पर हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश की 271 नदियों में 296 प्रदूषित नदी खंड चिन्हित किए गए हैं। हालांकि 2018 की तुलना में स्थिति में कुछ सुधार भी हुआ है। उस समय 351 प्रदूषित नदी खंड थे, जो घटकर 296 रह गए हैं। विनोद/ 14 मार्च /2026