ज़रा हटके
15-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को लचीला बनाता है बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। इन्हीं योगासन में से एक महत्वपूर्ण आसन है मारीच्यासन, जिसे नियमित रूप से करने से शरीर की कई समस्याओं में राहत मिल सकती है। मारीच्यासन का नाम प्राचीन ऋषि मारीचि के नाम पर रखा गया है। संस्कृत में ‘मारीच’ का अर्थ प्रकाश की किरण यानी सूर्य या चंद्रमा की किरण होता है, जबकि ‘आसन’ का अर्थ बैठने की मुद्रा या योग की स्थिति से है। यह आसन शरीर की कई मांसपेशियों को सक्रिय करने के साथ-साथ रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाने में मदद करता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार मारीच्यासन मेरुदंड यानी रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ाने के लिए बेहद उपयोगी योगासन है। इसके नियमित अभ्यास से पाचन क्रिया बेहतर होती है और मधुमेह के प्रबंधन में भी सहायता मिल सकती है। यह आसन शरीर की कार्यक्षमता को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ ऊर्जा के स्तर को भी बढ़ाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस आसन को नियमित रूप से करने से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और तनाव कम होने में मदद मिलती है। इसके अलावा यह पेट के कई महत्वपूर्ण अंगों को सक्रिय करता है, जिनमें लिवर, किडनी, प्लीहा, अग्न्याशय, छोटी आंत और पित्ताशय शामिल हैं। यही कारण है कि इसे पाचन तंत्र को मजबूत बनाने वाले प्रभावी योगासन में भी गिना जाता है। मारीच्यासन करने की प्रक्रिया भी काफी सरल है। इसके लिए सबसे पहले जमीन पर दंडासन की मुद्रा में बैठना होता है। इसके बाद दाहिने घुटने को मोड़कर बाएं हाथ को दाहिनी जांघ के बाहर रखा जाता है और सांस छोड़ते हुए शरीर को दाईं ओर मोड़कर पीछे की ओर देखा जाता है। यदि संभव हो तो दोनों हाथों को पीठ के पीछे पकड़ने की कोशिश की जाती है। कुछ देर गहरी सांस लेने के बाद यही प्रक्रिया दूसरी दिशा में दोहराई जाती है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शुरुआती लोग इस आसन का अभ्यास धीरे-धीरे और किसी प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में करें। मालूम हो कि आज की तेज रफ्तार और व्यस्त जीवनशैली में लोग अक्सर तनाव, कमर दर्द, गर्दन में जकड़न और पाचन संबंधी समस्याओं से जूझते नजर आते हैं। ऐसे में योग को स्वास्थ्य के लिए एक प्रभावी और सरल उपाय माना जाता है। सुदामा/ईएमएस 15 मार्च 2026