व्यापार
15-Mar-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग के पीछे सरकार की प्रोत्साहन नीतियां और सब्सिडी बड़ी वजह मानी जा रही हैं, जिसके चलते अब कई ग्राहक पारंपरिक पेट्रोल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर खरीदने वाले ग्राहकों के लिए मौजूदा समय काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इन वाहनों पर मिलने वाला डिमांड इंसेंटिव केवल 31 मार्च 2026 तक ही उपलब्ध रहेगा। इसके बाद यह सब्सिडी समाप्त हो जाएगी। हालांकि केंद्र सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन योजना पीएम ई-ड्राइव स्कीम 31 मार्च 2028 तक लागू रहेगी, लेकिन दो और तीन पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए मौजूदा प्रोत्साहन सीमित अवधि के लिए ही है। ऐसे में जो लोग इलेक्ट्रिक स्कूटर या बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए अभी खरीदारी करना अधिक लाभदायक हो सकता है। यह योजना 1 अक्टूबर 2024 से शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना और स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया, तीनपहिया, ई-एम्बुलेंस और इलेक्ट्रिक ट्रकों के उपयोग को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। योजना के अंतर्गत सरकार सीधे आर्थिक प्रोत्साहन भी प्रदान कर रही है। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पर बैटरी क्षमता के आधार पर इंसेंटिव दिया जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में यह प्रोत्साहन प्रति किलोवाट-घंटा 5,000 रुपये तक था, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह घटकर 2,500 रुपये प्रति किलोवाट-घंटा रह जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को आसान बनाने के लिए चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। देशभर में हजारों सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई गई है, जिसके लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये की सहायता निर्धारित की गई है। इसके अलावा कई कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर पर अतिरिक्त छूट और विशेष ऑफर भी दे रही हैं। बता दें कि भारत में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में लगातार नई कंपनियां भी प्रवेश कर रही हैं। हालांकि बिक्री के मामले में अभी भी कुछ बड़ी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है, लेकिन छोटे ब्रांड भी अपनी पहचान बनाने में जुटे हैं। सुदामा/ईएमएस 15 मार्च 2026