क्षेत्रीय
15-Mar-2026
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- बिखरते रिश्तों को फिर मिला सहारा बिलासपुर (ईएमएस)। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। बिलासपुर कुटुम्ब न्यायालय में आयोजित इस लोक अदालत में पारिवारिक विवादों को सुलझाने के लिए विशेष पहल की गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिराजुद्दीन कुरैशी के मार्गदर्शन तथा कुटुम्ब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश आलोक कुमार के नेतृत्व में आयोजित लोक अदालत में कुल 124 प्रकरणों का आपसी सहमति से निराकरण किया गया। लोक अदालत में भरण-पोषण, दाम्पत्य पुनस्र्थापना, हिन्दू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम तथा संरक्षण प्रतिपाल्य से जुड़े मामलों को प्राथमिकता से रखा गया। कई वर्षों से चल रहे विवादों को समझाइश, काउंसलिंग और आपसी सहमति से सुलझाया गया। इन मामलों में न्यायालय द्वारा कुल 90 हजार रुपये की अवार्ड राशि भी दिलाई गई। तीन खण्डपीठों में हुआ मामलों का निराकरण नेशनल लोक अदालत के दौरान कुटुम्ब न्यायालय की तीन अलग-अलग खण्डपीठों में मामलों की सुनवाई हुई। न्यायाधीश आलोक कुमार की खण्डपीठ में 77 प्रकरण, प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीश निरंजन लाल चौहान की खण्डपीठ में 24 प्रकरण तथा द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश स्वर्णलता टोप्पो की खण्डपीठ में 23 प्रकरणों का निराकरण किया गया।लोक अदालत में दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से आए पक्षकारों के साथ ही शहरी क्षेत्र के पीडि़त परिवारों ने भी भाग लिया। 30 साल पुराने भरण-पोषण विवाद का हुआ अंत प्रधान न्यायाधीश आलोक कुमार की खण्डपीठ में एक ऐसा मामला सामने आया, जो पिछले तीन दशकों से भरण-पोषण के विवाद में उलझा हुआ था। सकरी निवासी एक महिला और उसके पति के बीच यह विवाद लंबे समय से चल रहा था। पति मजदूरी कर जीवन यापन करता था और कई बार आर्थिक तंगी के कारण भरण-पोषण की राशि नहीं दे पाने पर उसे जेल भी जाना पड़ा था।लोक अदालत में दोनों पक्षों को समझाने के बाद पति ने पत्नी को एकमुश्त 90 हजार रुपये की स्थायी भरण-पोषण राशि देने पर सहमति जताई, जिसे पत्नी ने भी स्वीकार कर लिया। इसके साथ ही वर्षों पुराना यह विवाद समाप्त हो गया। पिता-पुत्रियों का भावुक मिलन द्वितीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश स्वर्णलता टोप्पो की खण्डपीठ में एक बेहद भावुक मामला सामने आया। चकरभाठा थाना क्षेत्र के अचानकपुर निवासी तीन बेटियों ने वर्ष 2021 में अपने बोदरी निवासी पिता के खिलाफ हिन्दू दत्तक भरण-पोषण अधिनियम के तहत मामला दायर किया था।परिवार में विवाद की वजह पिता का कथित शराब सेवन बताया जा रहा था, जिससे घर का माहौल बिगड़ गया था। लोक अदालत में पिता ने शराब न पीने की बात कही और बेटियों को साथ रखने की इच्छा जताई। तीनों बेटियां, जो वर्तमान में कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं, उन्होंने भी पिता के साथ रहने की सहमति दे दी।जैसे ही यह सहमति बनी, पिता ने अपनी बेटियों को गले लगा लिया। इस दौरान अदालत परिसर में भावुक दृश्य देखने को मिला और पिता की आंखों से आंसू बह निकले। कुटुम्ब न्यायालय की परामर्शदाता शमशाद गुल कुरैशी के प्रयासों से यह परिवार फिर से एक हो सका। गलत-फहमी दूर हुई, फिर साथ रहने का फैसला लोक अदालत में एक और मामला सामने आया, जिसमें गलतफहमी के कारण एक नवविवाहित दंपती अलग-अलग रह रहा था। मस्तूरी निवासी युवक और बोकारो निवासी युवती ने आदर्श विवाह किया था, लेकिन दिसंबर 2025 से दोनों के बीच विवाद के चलते अलगाव की स्थिति बन गई थी।काउंसलिंग के दौरान दोनों पक्षों की गलतफहमियां दूर की गईं। इसके बाद दोनों ने न्यायालय के समक्ष हंसते हुए एक साथ रहने की सहमति जताई और खुशी-खुशी अपने घर लौट गए। टूटते परिवारों को फिर मिला सहारा प्रथम अतिरिक्त न्यायाधीश निरंजन लाल चौहान की खण्डपीठ में भी कई पारिवारिक विवादों को समझाइश के माध्यम से सुलझाया गया। भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में अलग-अलग रह रहे पति-पत्नी को बच्चों के भविष्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों का हवाला देकर समझाया गया।दोनों पक्षों ने बच्चों और परिवार के हित में साथ रहने का निर्णय लिया और अदालत से ही एक साथ अपने घर रवाना हो गए। न्यायमित्रों की रही अहम भूमिका नेशनल लोक अदालत की सफलता में कुटुम्ब न्यायालय के परामर्शदाताओं और न्यायमित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। परामर्शदाता टी.आर. कश्यप, शमशाद गुल कुरैशी और गेस बाई टंडन ने कई मामलों में धैर्यपूर्वक काउंसलिंग कर पक्षकारों को समझौते के लिए तैयार किया। मनोज राज 15 मार्च 2026