राष्ट्रीय
15-Mar-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच एक अरब डॉलर की किस्त जारी करने को लेकर चल रही बातचीत एक बार फिर ठप पड़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसकी वजह मौजूदा बजट की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल और टैक्‍स कलेक्‍शन का कम होना है। कराची के अखबार बिजनेस रिकॉर्डर के अनुसार, आईएमएफ ने एक बार फिर पाकिस्तान के टैक्स सिस्टम पर सवाल उठाए हैं। आईएमएफ का कहना है क‍ि राजस्व लक्ष्य हासिल होना मुश्किल दिखाई देता है। लेख में कहा गया है, “यह चिंता जायज है। पाकिस्तान की कर व्यवस्था लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन करती रही है। देश का टैक्स-टू-जीडीपी अनुपात 9-10 प्रतिशत के आसपास ही अटका है, जो समान उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम है। कर दायरा सीमित है, अनौपचारिक अर्थव्यवस्था बहुत बड़ी है और कर अनुपालन भी कमजोर है।” दशकों से हर आईएमएफ कार्यक्रम में पाकिस्तान से कर प्रशासन सुधारने, कर आधार बढ़ाने और राजस्व लक्ष्य बढ़ाने की मांग की जाती रही है, लेकिन इन प्रयासों के बावजूद नतीजे सीमित ही रहे हैं। औपचारिक क्षेत्र अभी भी कर का अधिकांश बोझ उठाता है, जबकि संपत्ति के बड़े हिस्से, खासतौर पर खुदरा कारोबार, कृषि और अन्य क्षेत्रों पर बहुत कम कर लगता है या वे पूरी तरह व्यवस्था से बाहर हैं। अनौपचारिक अर्थव्यवस्था, जिसे अक्सर जीडीपी का लगभग 40 प्रतिशत माना जाता है, काफी हद तक कर प्रणाली की पकड़ से बाहर है। सुबोध/१५-०३-२०२६