-विशेषज्ञ बोले-तेहरान के पास अब भी ऐसी रणनीतिक क्षमता, वह युद्ध का बदल सकता है रुख वॉशिंगटन,(ईएमएस)। ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को दो सप्ताह से ज्यादा समय बीत जाने के बावजूद तेहरान में सत्ता परिवर्तन नहीं हो पाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जल्द ही सैन्य जीत का दावा कर सकते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान आगे किस तरह की प्रतिक्रिया देता है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक युद्ध में ईरान की नौसेना को भारी नुकसान हुआ है। उसकी कई मिसाइलें नष्ट हो चुकी हैं और कुछ शीर्ष सैन्य कमांडर भी मारे गए हैं। इसके बावजूद ट्रम्प के राजनीतिक लक्ष्य अब तक पूरे नहीं हुए हैं। ईरान में पुराना शासन कायम है और उसने होर्मुज स्ट्रेट के जरिए वैश्विक तेल आपूर्ति को प्रभावित कर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेहरान के पास अब भी ऐसी रणनीतिक क्षमता है जिससे वह युद्ध का रुख बदल सकता है। इस युद्ध का असर अमेरिका के अंदर भी दिखाई देने लगा है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद पेट्रोल की कीमतों में करीब 25 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खाद की कीमतें बढ़ने से किसानों की लागत भी बढ़ गई है। वहीं अमेरिकी सैनिकों की मौत का आंकड़ा 13 तक पहुंच गया है। ऐसे में ट्रम्प ही पार्टी के कई नेता उनसे युद्ध खत्म कर घरेलू अर्थव्यवस्था पर ध्यान देने की मांग कर रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका एकतरफा युद्ध रोक भी देता है तो भी तेल की कीमतों में तुरंत गिरावट की गारंटी नहीं है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर हमला करने की क्षमता रखता है। इससे फारस की खाड़ी के उन देशों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इसी बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी नई आशंकाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध के बाद ईरान में कट्टरपंथी ताकतें और मजबूत हो सकती हैं, जिससे वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान के पास अभी भी करीब 440 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम मौजूद है, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी देश संभावित खतरे के रूप में देखते हैं। मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि यह संघर्ष केवल सैन्य जीत का सवाल नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले की आशंका ने दुनिया भर के तेल बाजार और रणनीतिक संतुलन को और अधिक अनिश्चित बना दिया है। सिराज/ईएमएस 17 मार्च 2026