अंतर्राष्ट्रीय
17-Mar-2026
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तेहरान (ईएमएस)। वर्तमान में ईरान भीषण युद्ध की आग में झुलस रहा है। अमेरिकी और इजरायली हमलों ने न केवल देश के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन को भी नर्क बना दिया है। युद्ध के कारण पैदा हुई बदहाली और आसमान छूती महंगाई ने ईरानी लोगों को अपना घर छोड़कर पड़ोसी देश इराक की ओर भागने पर मजबूर कर दिया है। हाजी उमरान बॉर्डर क्रॉसिंग जैसे ही खुली, वहां इंसानियत की बेबसी की तस्वीरें साफ दिखाई देने लगीं। युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार जब सीमा खुली, तो दर्जनों ईरानी परिवार उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र में दाखिल हुए। उनके झोलों में सामान कम और जिंदा रहने की उम्मीदें ज्यादा थीं। युद्ध ने ईरान की अर्थव्यवस्था को इस कदर चोट पहुंचाई है कि लोग अब सिर्फ बुनियादी जरूरतों जैसे चावल, तेल और सिम कार्ड के लिए मीलों का सफर तय कर रहे हैं। इजरायली हवाई हमलों और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान में महंगाई बेकाबू हो चुकी है, जिससे आम आदमी की पहुंच से राशन बाहर हो गया है। सीमा पार करने वाले लोगों ने बताया कि ईरान के भीतर हालात बेहद खौफनाक हैं। सुरक्षा बलों के ठिकाने और खुफिया दफ्तर तबाह हो चुके हैं, जिसके कारण अधिकारी अब स्कूलों और अस्पतालों में पनाह ले रहे हैं। इंटरनेट पूरी तरह ठप है, जिससे लोग अपने करीबियों से संपर्क तक नहीं कर पा रहे हैं। पीरानशहर की एक महिला ने बताया कि वह केवल एक फोन कॉल करने और सिम कार्ड खरीदने के लिए 15 किलोमीटर पैदल चलकर इराक आई, क्योंकि 16 दिनों से उसके परिवार को उसकी खैर-खबर नहीं मिली थी।इराक का कुर्द इलाका अब इन युद्धग्रस्त ईरानियों के लिए एक जीवन रेखा बन गया है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों के कारण यहां के लोग ईरानियों की मदद कर रहे हैं। सीमा पर ट्रकों की लंबी कतारें लगी हैं, जो इराक से सस्ता राशन लेकर ईरान जा रही हैं। स्थानीय ड्राइवरों का कहना है कि सीमा बंद होने से अमीर-गरीब सभी बुरी तरह प्रभावित हुए थे। युद्ध की सबसे दर्दनाक मार उन बेसहारा परिवारों पर पड़ी है जिन्होंने अपनों को खो दिया है। एक बुजुर्ग महिला, जिसके बेटे की पहले ही मौत हो चुकी थी, मूसलाधार बारिश में अपने तीन पोते-पोतियों का पेट भरने के लिए मदद मांगने इराक पहुंची। युद्ध और बढ़ती कीमतों ने ईरानी समाज को उस मुहाने पर खड़ा कर दिया है, जहां लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं। यह संघर्ष केवल दो देशों की सेनाओं के बीच नहीं, बल्कि एक आम ईरानी नागरिक के अस्तित्व की लड़ाई बन गया है। वीरेंद्र/ईएमएस 17 मार्च 2026