मुंबई (ईएमएस)। सोशल मीडिया पर कनाडाई-भारतीय अभिनेत्री लिसा रे अक्सर अपने विचारों और अनुभवों को साझा करती रहती हैं। हाल ही में अभिनेत्री ने एक खास नोट के जरिए बताया कि वह इन दिनों अपनी कविताओं की किताब पर काम कर रही हैं। अपने अकाउंट इंस्टाग्राम पर जानकारी देते हुए अभिनेत्री ने बताया कि शब्द हमेशा से उनके लिए सहारा रहे हैं और अब वह अपनी कविताओं को एक किताब के रूप में पाठकों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही हैं। लिसा रे ने अपने नोट में लिखा कि जब भी जीवन उलझा हुआ और जटिल लगता है, तब भाषा और शब्द उन्हें स्थिरता देते हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक ऐसी शांत और सुरक्षित जगह बनाई थी, जहां वह अपनी कविताएं साझा कर सकें। अब उन्हें महसूस हो रहा है कि इस रचनात्मक यात्रा को व्यापक रूप से लोगों के सामने लाने का सही समय आ गया है। अभिनेत्री के अनुसार वह धीरे-धीरे और निजी तौर पर अपनी कविताओं की एक किताब पर काम कर रही हैं, जिसे जल्द ही प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने अपने संदेश में यह भी लिखा कि कठिन और अंधेरे समय में लोग कला, संगीत और भाषा के जरिए अपने मन का बोझ हल्का करते हैं। इसी प्रक्रिया में सृजन और अभिव्यक्ति इंसान को मानसिक ताकत देती है। अभिनेत्री ने बताया कि उनके दूसरे घर दुबई में हाल की घटनाओं को देखना उनके लिए काफी कठिन रहा है। हालांकि यूनाइटेड अरब अमीरात के नागरिक अपेक्षाकृत सुरक्षित हैं और वहां की नेतृत्व व्यवस्था मजबूत है, लेकिन अनिश्चितता और दोस्तों से मिल रहे संदेशों ने माहौल को भावनात्मक रूप से भारी बना दिया है। अपनी पोस्ट में लिसा रे ने एक नई कविता की पंक्तियां भी साझा कीं, जो उनके मन में सुबह के समय आई थीं। उन्होंने बिना किसी बदलाव के उस कविता को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। अभिनेत्री ने बताया कि यह कविता खास तौर पर उन लोगों के लिए है, जो अस्थिर और कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पति का बचपन लेबनान में बीता, जहां कभी-कभी ऊपर से मिसाइलें गिरने जैसी भयावह परिस्थितियां भी देखनी पड़ती थीं। यह कविता उनके साहस, उनके परिवार की दृढ़ता और दुनिया भर के उन परिवारों को समर्पित है, जिनकी रोजमर्रा की जिंदगी में सायरन की आवाज भी शामिल रही है। लिसा रे ने अपनी कविता की एक खास पंक्ति भी साझा की, जिसमें लिखा है, “जब आप पंखुड़ियों की ओर हाथ बढ़ाते हैं और सिर गायब होता है।” उन्होंने बताया कि यह पंक्ति उनकी बहन के आने वाले उपन्यास ‘द फर्स्ट हाउस’ से प्रेरित है। अभिनेत्री के अनुसार कला एक-दूसरे से जुड़ती है और लोग एक-दूसरे के शब्दों से साहस हासिल करते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि अगर समय अनिश्चितताओं से भरा हो, तो उसका जवाब सृजन, सहानुभूति और अपनी आवाज उठाकर देना चाहिए। सुदामा/ईएमएस 17 मार्च 2026