नई दिल्ली (ईएमएस)। इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आईआईआईटी-दिल्ली) ने स्वीडन के साथ मिलकर निमोनिया के इलाज के लिए नई दवाओं की खोज हेतु एक अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना शुरू की है। यह पहल कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी का उपयोग करके पेप्टाइड-आधारित चिकित्सीय विकसित करेगी। निमोनिया जैसी सांस की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए नई दवाओं की खोज को तेज करने के उद्देश्य से इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आईआईआईटी-दिल्ली) ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। स्वीडन के प्रमुख शोध संस्थानों के साथ एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के लिए संस्थान को इंडो-स्वीडिश सहयोग कार्यक्रम के तहत डीबीटी-विनोवा से शोध अनुदान प्राप्त हुआ है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और कम्प्यूटेशनल बायोलाॅजी की मदद से ऐसे पेप्टाइड आधारित चिकित्सीय तकनीक विकसित करनी है, जो निमोनिया पैदा करने वाले रोगाणुओं से प्रभावी ढंग से लड़ सकें। पारंपरिक दवा खोज प्रक्रिया में वर्षों का समय लगता है, लेकिन एआई आधारित तकनीकों से संभावित दवाओं की पहचान और परीक्षण की प्रक्रिया कहीं अधिक तेज और किफायती हो सकती है। परियोजना के तहत भारत और स्वीडन के वैज्ञानिक मिलकर मशीन लर्निंग माॅडल तैयार करेंगे, जो संभावित पेप्टाइड दवाओं की रोगाणुरोधी क्षमता, एलर्जी प्रभाव और विषाक्तता जैसी महत्वपूर्ण विशेषताओं का अनुमान लगाने में सक्षम होंगे। इसके बाद इन कम्प्यूटेशनल भविष्यवाणियों को प्रयोगशाला में परीक्षण के जरिए सत्यापित किया जाएगा, जिससे दवा के प्रभाव और सुरक्षा का आकलन किया जा सके। इस शोध परियोजना का नेतृत्व आईआईआईटी-दिल्ली के डाॅ. अरुल मुरुगन मुख्य अन्वेषक के रूप में कर रहे हैं, जबकि प्रो. जीपीएस राघव और डाॅ. विभोर कुमार सह-अन्वेषक हैं। स्वीडन की ओर से केटीएच रायल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाॅजी के डाॅ. वैभव श्रीवास्तव और कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के डाॅ. उज्ज्वल न्योगी इस शोध में सहयोग कर रहे हैं। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ ईएमएस/17/मार्च /2026