नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली-एनसीआर में आतंकियों द्वारा सोलर-बेस्ड कैमरे लगाने से सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है। ये कैमरे बिना बाहरी बिजली के लंबे समय तक जासूसी कर सकते हैं, जिससे सीमा पार बैठे आका वीआईपी मूवमेंट और सुरक्षा चौकियों पर नजर रख सकते हैं। दिल्ली-एनसीआर में आतंकियों द्वारा सोलर-बेस्ड कैमरे लगाने के मामले ने सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। सुरक्षा एजेंसियां दिल्ली-एनसीआर के संवेदनशील इलाकों में संदिग्ध सोलर-बेस्ड कैमरों की मौजूदगी को लेकर कई बार अलर्ट जारी कर चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पारंपरिक जासूसी से कहीं अधिक खतरनाक होता है, क्योंकि सोलर पैनल होने के कारण इन कैमरों को बाहरी बिजली या बैटरी बदलने की जरूरत नहीं होती है। यह एक बार लगाओ और भूल जाओ जैसी तकनीक पर काम करता है, जिससे जासूसी करने वाले को लंबे समय तक संवेदनशील डाटा मिलते रहता है। स्पेशल सेल के एक अधिकारी का कहना है कि ये कैमरे अक्सर एन्क्रिप्टेड क्लाउड या विदेशी सर्वरों से जुड़े होते हैं। सीमा पार बैठे आका दिल्ली की सड़कों, वीआइपी मूवमेंट और सुरक्षा चौकियों को लाइव देख सकते हैं। ये कैमरे छोटे होते हैं और अक्सर पेड़ की टहनियों, स्ट्रीट लाइटों या ऊंची इमारतों के कोनों में छिपा दिए जाते हैं। सामान्य व्यक्ति इन्हें साधारण वाई-फाई कैमरा समझकर नजरअंदाज कर देता है। इस तरह के कैमरे लगाने का मुख्य उद्देश्य किसी बड़े हमले से पहले इलाके की डिजिटल रेकी करने के जैसा होता है, ताकि वहां की सारी गतिविधियों के पैटर्न को ठीक से समझा जा सके। अगर देश की सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय पुलिस द्वारा समय रहते इस तरह के कैमरों को नहीं हटाया गया, तो इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ ईएमएस/17/मार्च /2026