कैसी विडंबना है कि जीवनदान देने वाले अस्पताल अब लाक्षागृह बनते जा रहे है और लोग असमय काल के गाल में समा रहे हैं जहां लोग जीवन बचाने के लिए जाते है अगर वहां मौत नसीब हो तो यह वहुत ही खौफनाक त्रासदी है। ताजा घटना में ओडिशा के एससीबी मेडिकल कालेज व अस्पताल में हुआ जहां आग लगने से 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और 13 लोग घायल हो गए। आईसीयू में 23 मरीज दाखिल थे ।आग सुबह अढाई और तीन बजे के करीब लगी जिससे अफरा तफरी मच गई ।यह कोई पहला हादसा नहीं है इससे पहले भी हजारों हादसे हो चुके हैं।आंकडों के अनुसार कुछ साल पहले मुबंई के ईएसआईसी कामगार असपताल में आग लगने से छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और 146 लोग घायल हो गए थे । मरीजों व तीमारदारों को निकलने का मौका नहीं लगा और बेमौत मारे गए। छह लोगों की बुरी तरह झुलसने से मौत हो गइ थी। आग के कारणों का पता नहीं चल सका पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के मैडिकल कालेज व अस्पताल में भीषण आग लगने से तीन लोंगों की मौत हो गई थी और 18 लोग बुरी तरह झुलस गए थे।मृतको में एक बच्चा व दो महिलाएं शामिल थे।आग एसी मशीन के कारण लगी बताई जा रही थी।हादसे के समय सैकडों मरीज कर्मचाारी मौजूद थे मगर लोगों ने भागकर अपनी जान बचाई। असपताल में चारों तरफ धुआं फेल गया था गनीमत रही लोग सुरक्षित स्थानों की तरफ भाग गए नहीं तो मृतकों का आंकडा ब-सजय सकता था। देश में अस्पतालों में आग का यह कोई पहला मामला नहीं है हर रोज कहीं न कहीं से ऐसे हादसे होतें रहते है कुछ दिन व्यवस्था ठीक रहती है फिर वही परिपाटी चल पडती है। सरकारें मुआवजा देकर अपना फर्ज निभाती है लेकिन मुआवजा इसका हल नही है। हादसों में झुलस गए लोग ताउम्र इसका दंश झेलेगें ।आज समूचे भारत में प्रतिदिन भीषण अग्निकांड़ हो रहे है। इन अग्निकांड़ो से कई प्रशन सुलगते जा रहे है कि देश के मसीहाओं को इन हादसों से कोई सरेाकार नहीं होता। सरकार को ऐसे हादसों से सबक सीखना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों पर रोक लग सके यह जनहित में है।सर्तकता बरतनी होगी।अगर अब भी लापरवाही बरती तो ऐसे हादसे होते रहेगें वक्त अभी संभलने का है। ईएमएस / 17 मार्च 26