राज्य
17-Mar-2026


हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार से किया जबाव तलब जबलपुर, (ईएमएस)। मप्र हाईकोर्ट के न्यायाधीश विशाल मिश्रा की कोर्ट ने नवोदय स्कूलों में ईडब्ल्यूएस वर्ग को प्रवेश में जगह दिए जाने से संबंधित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में इस संबंध में सूचना जारी की जा चुकी हैं लेकिन इसके बाद भी आज तक कोई ध्यान नहीं दिया गया| जिससे आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग को नवोदय विद्यालय में प्रवेश नहीं मिल पा रहा। अगली सुनवाई अब एक सप्ताह बाद होगी। जबलपुर निवासी छात्रा नव्या तिवारी की ओर से उनके अभिभावक धीरज तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए कोर्ट को बताया कि नवोदय विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण और वंचित वर्ग के प्रतिभाशाली छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। ऐसे में ईडब्ल्यूएस वर्ग को बाहर रखना नीति के उद्देश्य के विपरीत है। याचिका में यह भी बताया गया है कि जवाहर नवोदय विद्यालयों में प्रवेश के दौरान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग, ग्रामीण छात्रों, बालिकाओं व दिव्यांग छात्रों के लिए विस्तृत आरक्षण व्यवस्था लागू है। लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए कोई भी आरक्षण या विशेष प्रावधान नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास मिश्रा ने कोर्ट को बताया कि भारत सरकार एजुकेशन मंत्रालय ने एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए कोई अलग स्थान या आरक्षण नहीं है। याचिका में यह भी बताया गया कि संविधान के 103वें संशोधन (2019) के माध्यम से अनुच्छेद 15(6) जोड़ा गया है। जिसमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए शिक्षा संस्थानों में 10 प्रतिशत तक आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद नवोदय विद्यालयों की प्रवेश नीति में ईडब्ल्यूएस को शामिल नहीं किया गया, जिसे याचिका में संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी बताया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस ) को पूरी तरह से बाहर रखना नीति की मूल भावना के विपरीत है। याचिका में हाल ही में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया है। जिसमें न्यायालय ने ईडब्ल्यूएस छात्रों को अवसर न मिलने को गंभीर मुद्दा मानते हुए राहत प्रदान की थी। सुनील साहू / मोनिका / 17 मार्च 2026/ 06.50