अंतर्राष्ट्रीय
17-Mar-2026


153 डॉलर प्रति बैरल हुआ तेल अवीव/तेहरान(ईएमएस)। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग का आज 18वां दिन है। इस जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। तेल की कीमत बढक़र 153 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो हाल के समय में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक मानी जा रही है। इस बढ़ोतरी का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, खासकर उन देशों पर जो तेल के आयात पर निर्भर हैं। तेल की कीमतों में अचानक आई इस तेजी के चलते कई देशों में महंगाई बढऩे की आशंका जताई जा रही है। परिवहन, बिजली और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इसी बीच, श्रीलंका ने घोषणा की है कि अब सरकारी दफ्तर हफ्ते में 4 दिन ही खुलेंगे। यह फैसला ईंधन बचाने और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए लिया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी आएगी और देश की आर्थिक स्थिति को संभालने में मदद मिलेगी। इससे पहले भी श्रीलंका आर्थिक संकट और ईंधन की कमी का सामना कर चुका है। भारत ने होर्मुज स्ट्रेट के पास दो वॉरशिप तैनात किए भारत ने ईरान के पास मौजूद दुनिया के अहम समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट के पास अपने दो युद्धपोत तैनात किए हैं। भारतीय नौसेना के ये टास्क फोर्स जहाज तेल और गैस लेकर भारत आने वाले व्यापारिक जहाजों और टैंकरों को सुरक्षा देंगे। साथ ही जरूरत पडऩे पर उन्हें हर तरह की सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरे के बीच भारत अपने ऊर्जा सप्लाई मार्ग और समुद्री व्यापार की सुरक्षा को लेकर सतर्क है। इजराइल ने लेबनान में ग्राउंड ऑपरेशन और आगे बढ़ाया इजराइली सेना ने कहा है कि उसने लेबनान के दक्षिणी हिस्से में अपना ग्राउंड ऑपरेशन और आगे बढ़ा दिया है। इस ऑपरेशन में अब सेना की डिविजन 36 भी शामिल हो गई है। सेना के मुताबिक, इस डिविजन को भेजने से पहले इलाके में कई ठिकानों पर हवाई और जमीनी हमले किए गए, ताकि आगे की कार्रवाई आसान हो सके। इजराइल का कहना है कि इन ऑपरेशनों का मकसद हिजबुल्लाह के ठिकानों और हथियारों को खत्म करना है, जो उसकी सीमा के लिए खतरा है। डिविजन 36 इजराइल की सेना की एक बड़ी और अहम आर्मी यूनिट है। यह एक बड़ी सैन्य टुकड़ी होती है, जिसमें हजारों सैनिक शामिल होते हैं। इसमें टैंक (आर्मर्ड यूनिट), पैदल सेना (इन्फैंट्री) और तोपखाना शामिल होते हैं। इसका काम सीधी लड़ाई करना होता है। जंग का फैसला सोशल मीडिया नहीं, मैदान में होगा ईरान की सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फघारी ने अमेरिका के ट्रम्प को संबोधित करते हुए कहा है कि युद्ध का अंत सोशल मीडिया से नहीं, बल्कि युद्ध के मैदान में तय होगा। ईरान के अन्य सैन्य अधिकारियों ने भी कहा कि युद्ध कब खत्म होगा और कितना लंबा चलेगा, यह फैसला ईरान करेगा, अमेरिका नहीं। उन्होंने कहा कि आपने इसे शुरू किया है, हम इसे खत्म करेंगे। मिडिल ईस्ट में अमेरिका की मौजूदगी से कोई फायदा नहीं ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका की मौजूदगी से कोई फायदा नहीं है। उनके मुताबिक, इससे सुरक्षा नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि इस इलाके की सुरक्षा यहां के देश खुद मिलकर तय करेंगे, बाहर के देशों की जरूरत नहीं है। कालीबाफ ने यह भी कहा कि आने वाले समय में मिडिल ईस्ट बदलेगा, लेकिन यह बदलाव अमेरिका के हिसाब से नहीं होगा। साथ ही उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका को अब इस इलाके से अपनी सेना हटा लेनी चाहिए। विनोद उपाध्याय / 17 मार्च, 2026