नई दिल्ली (ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और तेल आपूर्ति में बाधा के बीच भारत की भूमिका अब पूरे दक्षिण एशिया के लिए अहम बनती जा रही है। पड़ोसी देशों में संभावित ईंधन संकट को देखते हुए भारत ने अतिरिक्त सप्लाई के अनुरोधों पर विचार शुरू किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश ने भारत से मौजूदा समझौते के तहत मिलने वाले 1.8 लाख टन डीजल के अलावा अतिरिक्त ईंधन की मांग की है। वहीं नेपाल ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से 3,000 टन अतिरिक्त एलपीजी की मांग की, लेकिन फिलहाल भारत ने तय मात्रा से ज्यादा सप्लाई देने से इंकार कर दिया है। नेपाल को मौजूदा समझौते के तहत हर महीने करीब 48,000 टन एलपीजी मिलती है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ( ने कहा कि भारत इन अनुरोधों की समीक्षा कर रहा है और फैसला अपनी ऊर्जा जरूरतों और उपलब्धता को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा के कारण तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है। दक्षिण एशियाई देशों में ईंधन संकट का खतरा बढ़ा है। वैकल्पिक सप्लाई रूट खोजना मुश्किल हो रहा है। भारत, जो दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर है, ने हालात से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश में फिलहाल पेट्रोल-डीजल का स्टॉक पर्याप्त है और रिफाइनरी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। सुबोध/१७-०३-२०२६