नई दिल्ली (ईएमएस)। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडराते खतरों को देखकर भारतीय नौसेना ने देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक अभेद्य समुद्री सुरक्षा कवच तैयार कर लिया है। इस रणनीतिक मिशन के तहत, नौसेना ने उत्तरी अरब सागर में दो विशेष टास्क फोर्स तैनात की हैं, जो भारत आने वाले कच्चे तेल और गैस के टैंकरों को संवेदनशील मार्गों से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए निरंतर एस्कॉर्ट प्रदान कर रही हैं। यह अभियान न केवल व्यापारिक जहाजों को संभावित हमलों या अवरोधों से बचाता है, बल्कि वैश्विक शिपिंग गलियारों में अनिश्चितता के बीच भारत की एनर्जी लाइफलाइन को बनाए रखता है। 2019 से इस क्षेत्र में अपनी सक्रिय उपस्थिति रख रही भारतीय नौसेना की यह त्वरित तैनाती भारत के उस कड़े संकल्प को दिखाती है, जहाँ वह अपनी अर्थव्यवस्था को किसी भी बाहरी दबाव या आपूर्ति में होने वाली रुकावट से सुरक्षित रखने के लिए हर स्तर पर तैयार है। नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि नौसेना ने उत्तरी अरब सागर में दो टास्क फोर्स तैनात की हैं, ताकि भारत आने वाले व्यापारिक जहाजों और टैंकरों का सुरक्षित आवागम मिल सके। सुरक्षा अभियान पिछले सप्ताह शुरू हुए थे, जिसमें नौसैनिक जहाज संवेदनशील हिस्सों से गुजरते समय जहाजों के साथ चलते हैं और फिर उन्हें भारतीय बंदरगाहों की ओर निर्देशित करते हैं। नौसेना वाणिज्यिक शिपिंग को पूरी सुरक्षा प्रदान कर रही है, जिसका उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास बढ़ते जोखिमों के बीच आपूर्ति में किसी भी रुकावट को रोकना है। यह तैनाती भारत की ऊर्जा जीवनरेखाओं को सुरक्षित करने के प्रयास का हिस्सा है, क्योंकि देश के कच्चे तेल और गैस आयात का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर जाता है। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान मिशन व्यापक समुद्री सुरक्षा ग्रिड का हिस्सा है, इस प्रमुख समुद्री मार्गों की रक्षा करने और ऊर्जा आपूर्ति के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदुओं में से एक बना हुआ है, जिससे इस क्षेत्र में कोई भी अस्थिरता भारत की अर्थव्यवस्था के लिए प्रत्यक्ष चिंता का विषय बन जाती है। बात दें कि नौसेना 2019 से समुद्री डकैती विरोधी और समुद्री सुरक्षा अभियानों के हिस्से के रूप में, ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी सहित आस-पास के जलक्षेत्रों में अपनी निरंतर उपस्थिति बनाए हुए है। यह नवीनतम तैनाती उन प्रयासों को आगे बढ़ाती है, और बढ़ते तनाव के बीच नौसेना की परिचालन पहुंच का विस्तार करती है। आशीष/ईएमएस 18 मार्च 2026