राष्ट्रीय
18-Mar-2026
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भगोड़े नीरव मोदी ने प्रत्यर्पण से बचने हाईकोर्ट से मांगी केस खोलने की अनुमति नई दिल्ली,(ईएमएस)। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने भारत प्रत्यर्पण से बचने के लिए फिर कानूनी दांव खेला है। मोदी ने लंदन की हाईकोर्ट में अपने प्रत्यर्पण को फिर से खोलने की अनुमति मांगी है। इस बार उनका मुख्य तर्क भारत में उनके साथ होने वाला अमानवीय व्यवहार और यातना का खतरा है। लंदन हाईकोर्ट की बेंच ने इस मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी कर ली है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई के दौरान नीरव मोदी उत्तरी लंदन की पेंटनविले जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ। जज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि यह मामला मिस्टर मोदी और भारत सरकार, दोनों के लिए अत्यंत अहम है। हम इस पर जल्द से जल्द अपना फैसला सुनाएंगे। मोदी की कानूनी टीम ने दलील दी कि प्रत्यर्पण होने पर भारतीय एजेंसियों की पूछताछ के दौरान उनके साथ अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार किया जा सकता है। नीरव मोदी के वकील ने दावा किया कि यातना का एक असली खतरा मौजूद है और उन्होंने भारत सरकार द्वारा दी गई आश्वासनों पर सवाल उठाते हुए उन्हें न तो पर्याप्त और न ही भरोसेमंद बताया। बचाव पक्ष ने यह भी आशंका जताई कि मोदी को मुंबई की आर्थर रोड जेल से गुजरात ले जाया जा सकता है, ताकि सीबीआई और ईडी के अलावा दूसरी एजेंसियां ​​भी उनसे पूछताछ कर सकें, इससे और भी चिंताएं बढ़ गई हैं। अपनी दलीलों के समर्थन में नीरव मोदी के वकीलों ने संजय भंडारी के मामले का हवाला दिया। संजय भंडारी को हाल ही में यूके में मानवाधिकारों के आधार पर प्रत्यर्पण से बरी कर दिया था। वकीलों ने दलील दी कि नीरव मोदी के मामले में भी इसी तरह की चिंताओं पर गौर किया जाना चाहिए। भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए, क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस ने इस अर्जी का ज़ोरदार विरोध किया। सीपीएस की बैरिस्टर हेलेन मैल्कम केसी ने दलील दी कि यह अर्जी देर से दाखिल की गई है और यह एक गलत आधार पर टिकी है। उन्होंने कोर्ट से सामान्य समझ वाला नज़रिया अपनाने की अपील करते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारत ने मजबूत आश्वासन दिए हैं और इस मामले की हाई-प्रोफाइल प्रकृति को देखते हुए किसी भी तरह के उल्लंघन की संभावना कम है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी तरह के उल्लंघन से भारत और यूके के बीच भविष्य में होने वाले प्रत्यर्पण सहयोग को नुकसान पहुंच सकता है। अगर हाईकोर्ट मोदी की अपील को फिर से खोलने की इजाज़त देने से इनकार करता है, तो मोदी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है। भारत में ट्रायल का सामना करने से पहले, उन्हें मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखे जाने की संभावना है। नीरव मोदी को करीब 2 अरब डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के सिलसिले में तलाशा जा रहा है। उन पर कई मामले चल रहे हैं, जिनमें सीबीआई द्वारा की गई धोखाधड़ी की जांच, ईडी द्वारा लगाए गए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप, और सबूतों व गवाहों के साथ छेड़छाड़ के आरोप शामिल हैं। 2021 में तत्कालीन यूके की गृह सचिव प्रीति पटेल ने उनके प्रत्यर्पण को मंज़ूरी दे दी थी, जब अदालतों को उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला मिला था। तब से नीरव मोदी ने यूके की अदालतों में जमानत के लिए कई अर्ज़ियाँ और अपीलें दायर की हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। सिराज/ईएमएस 18मार्च26 --------------------------------