गुरुवार से हो रही नव संवत्सर की शुरुआत -ज्योतिषीय संकेत- देश विदेश में कई बड़ी घटनाओं के घटित होने के भी योग बन रहे नई दिल्ली,(ईएमएस)। इस वक्त वैश्विक स्तर पर जिस तरह की उथल-पुथल मची हुई है। दुनिया एक नए बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। तीसरा विश्व युद्ध होने की आशंका है। मान्यताओं के मुताबिक 19 मार्च 2026 से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होगी, जिसे विक्रम संवत 2083 कहा जा रहा है। इस नए साल को रौद्र संवत्सर के नाम से भी जाना जा रहा है। ज्योतिषी के जानकार बताते हैं कि ऐसा समय करीब 60 साल पहले, साल 1966 में भी आया था। उस दौर में देश और दुनिया में कई बड़े राजनीतिक बदलाव हुए थे, जिनमें भारत की राजनीति में भी बड़ा परिवर्तन हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक यह संवत्सर 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 7 अप्रैल 2027 तक रहेगा। इस अवधि में ग्रहों की स्थिति भी खास रहने वाली है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक इस साल गुरु को राजा और मंगल को मंत्री का पद मिलेगा। माना जाता है कि जब ये दोनों ग्रह इस तरह प्रभाव में होते हैं, तो दुनिया में तेज बदलाव, संघर्ष और नए अवसर एक साथ दिखाई देते हैं। साथ ही देश विदेश में कई बड़ी घटनाओं के घटित होने के भी योग बन रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ज्योतिषीय संकेत बताते हैं कि जिन क्षेत्रों में पहले से संघर्ष चल रहा है, वहां तनाव और बढ़ सकता है। कुछ जगहों पर युद्ध की स्थिति भी गंभीर हो सकती है। भारत के लिए भी सुरक्षा के लिहाज से सतर्क रहने की जरूरत बताई जा रही है और पड़ोसी देशों के साथ तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इस संवत्सर के दौरान दुनिया की राजनीति में भी हलचल देखने को मिल सकती है। कुछ बड़े नेताओं के निधन या सत्ता परिवर्तन के योग बन सकते हैं। कई देशों में नई राजनीतिक ताकतें उभर सकती हैं। भारत में भी नीतियों और शासन से जुड़े बड़े फैसले सामने आ सकते हैं। वैश्विक मंच पर कई देशों के बीच नए समझौते हो सकते हैं। इनमें से कोई एक समझौता ऐसा भी हो सकता है जिसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और आर्थिक व्यवस्था पर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है। आने वाले समय में अंतरिक्ष मिशनों को लेकर भी प्रतिस्पर्धा तेज हो सकती है। भारत, अमेरिका, चीन, रूस और जापान जैसे देश इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे। वहीं एआई तकनीक भी बहुत तेजी से विकसित होगी। भविष्य में एआई केवल एक टूल नहीं बल्कि कई कामों में इंसानों का सहयोगी बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई देशों में कानून और नीतियों में बदलाव हो सकते हैं, जिनका उद्देश्य समाज में संतुलन और एकता बढ़ाना होगा। साथ ही शिक्षा व्यवस्था में भी बड़े सुधार देखने को मिल सकते हैं, ताकि नई पीढ़ी को आधुनिक सोच और तकनीक के साथ आगे बढ़ाया जा सके। सिराज/ईएमएस 18मार्च26 --------------------------------