लेख
18-Mar-2026
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरी बार राष्ट्रपति का पद संभाला उसके बाद से उनका अहंकार चरम पर पहुंच गया। वह अपने आपको शांति का मसीहा बताना चाहते थे। सारी दुनिया में ट्रंप को एक विश्व गुरु के रूप में जाना जाए इसके लिए उन्होंने वह सब प्रयास किया जो वह कर सकते थे। अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में वह राजनेता कम एक गैंगस्टर के रूप में ज्यादा नजर आए। पद संभालते ही उन्होंने यूक्रेन और रूस के बीच चल रहे युद्ध को बंद कराने की कोशिश की। इजरायल और हमास के बीच चली जंग को लेकर वह इजरायल के पक्ष में खड़े हुए। गाजा को पूरी तरह से समाप्त करके वहां अमेरिकी कॉलोनी बनाने का प्रयास किया। उन्होंने सारी दुनिया के देशों में अपने परिवार के व्यापार को बढ़ाने के लिए राष्ट्रपति पद का उपयोग किया। वह चाहते हैं, कि अमेरिका के वह तीसरी बार राष्ट्रपति बने, इसके लिए उन्होंने सारी दुनिया में अपनी ताकत का परचम फहराने की तो कोशिश की, सबसे पहले उन्होंने टैरिफ के माध्यम से सारी दुनिया के देशों को भयाक्रांत किया। अमेरिका की दादागिरी बताकर दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन उनके अहंकार और दादागिरी के कारण उनका हर दांव उल्टा पड़ता चला गया। आज डोनाल्ड ट्रंप अपने ही बनाये हुए मकड़जाल में फंसकर फड़फड़ा रहे हैं, लेकिन अब वह सामान्य व्यक्ति की तरह जिंदा रह पाएंगे या नहीं, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की दोस्ती उन्हें इतनी भारी पड़ेगी इसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। सत्ता के नशे में डूबे हुए डोनाल्ड ट्रंप अब अपनी कुर्सी बचाने के लिए ही संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। दरअसल इजरायल के उकसावे पर उन्होंने ईरान पर हमला किया। उन्होंने ईरान पर वेनेजुएला की तरह कब्जा करने की कोशिश की। वहां पर विद्रोह करवाने की साजिश रची। लेकिन कहते हैं जब अंत समय आता है उस समय बुद्धि सबसे पहले खराब होती है। लगता है यही ट्रंप के साथ हुआ। जैसे ही ईरान के सुप्रीमो आयतुल्लाह खामेनेई को सत्ता छोड़ने के लिए धमकाया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। एक स्कूल में हमला करके 180 से ज्यादा मासूम बच्चियों की हत्या कर दी गई। उसके बाद लगता है कि डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के पाप का घड़ा भर गया है। फिलिस्तीन में भी बड़ी संख्या में निर्दोष महिलाओं और बच्चों की हत्या इजरायल द्वारा की गई थी। बीमार, मजबूर लोगों तक खाना नहीं पहुंचने दिया गया। अस्पताल में इलाज करा रहे बच्चे, बुजर्ग और महिलाओं को हमला करके मार दिया गया। वही सब पाप अब दोनों नेताओं के अस्तित्व को समाप्त करने जा रहे हैं। ईरान युद्ध में अमेरिका पूरी तरह से अलग-थलग पड़ गया है। सभी सहयोगियों ने डोनाल्ड ट्रंप का साथ छोड़ दिया है। नाटो और यूरोपीय देशों को डोनाल्ड ट्रंप धमका रहे हैं, लेकिन इसका अभी कोई असर देखने को नहीं मिल रहा है। ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन और इटली ने युद्ध में कूदने से इनकार कर दिया है। सारी दुनिया के देशों में हाहाकार मचा हुआ है। यहां तक कि खाड़ी के देश जहां अमेरिका ने एक तरह से अपना कब्जा जमा लिया था वह भी अमेरिका के पक्ष में खड़े नहीं हो रहे हैं। दूसरी ओर ईरान के पक्ष में चीन, रूस, उत्तर कोरिया और अन्य कई देश प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से खड़े होकर उसका समर्थन कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप के साथी भी अब उनका साथ छोड़कर भाग रहे हैं। रही सही कसर अमेरिका में तेजी से बढ़ रही महंगाई पूरी किए दे रही है। बिना कांग्रेस की अनुमति के उन्होंने अपनी जिद में युद्ध शुरू कर लिया था। अमेरिका पर भारी कर्ज है। पिछले 20 दिनों में युद्ध में आर्थिक और सामरिक दृष्टि से जो नुकसान हुआ है उसके कारण अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों ही ट्रंप से नाराज है। वहीं एपिस्टिन फाइल ने भी बची हुई कसर को पूरी कर दी है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जनाक्रोष बढ़ता चला जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप जो ईरान में आयतुल्लाह खामेनेई को सत्ता से अपदस्थ कराने की साजिश रच रहे थे अब वह सब अमेरिका में उनके साथ होता हुआ दिख रहा है। जो गड्ढा डोनाल्ड ट्रंप ईरान के सुप्रीमो के लिए खोद रहे थे अब वह गड्ढा उनके लिए तैयार हो गया है। जैसी करनी वैसी भरनी का सिद्धांत अब डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू पर लागू होता दिख रहा है। ईएमएस / 18 मार्च 26