- स्कूल–प्रकाशक–दुकान गठजोड़ पर उठे सवाल जबलपुर, (ईएमएस)। शहर के निजी स्कूलों में किताबों के चयन और वितरण को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। अभिभावकों की लगातार शिकायतों के बाद अब यह मामला कमीशन के खेल के एंगल से देखा जा रहा है। आरोप हैं कि कुछ स्कूल प्रबंधन, चुनिंदा प्रकाशकों और सीमित पुस्तक विक्रेताओं के बीच ऐसा गठजोड़ काम कर रहा है, जिससे अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार शहर के कई निजी स्कूलों में रत्ना सागर प्राइवेट लिमिटेड, स्काई पब्लिकेशन, आवर्तन पब्लिकेशन और जूम पब्लिकेशन की किताबें अनिवार्य रूप से लागू की गई हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन ने अन्य प्रकाशकों के विकल्प उपलब्ध नहीं कराए और न ही ओपन मार्केट से खरीदने की स्पष्ट अनुमति दी। नियमों के मुताबिक, स्कूलों को सत्र शुरू होने से पहले पुस्तक सूची सार्वजनिक करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अभिभावक किताबें किसी भी अधिकृत विक्रेता से खरीद सकें। लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है। सीमित दुकानों तक सप्लाई से बढ़ीं कीमतें… मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। संबंधित प्रकाशकों द्वारा किताबों की आपूर्ति केवल कुछ चुनिंदा दुकानों तक सीमित रखी गई है। सामान्य पुस्तक विक्रेताओं के पास संबंधित किताबें उपलब्ध नहीं हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति बन गई है। अभिभावकों का आरोप है कि जब विकल्प सीमित हो जाते हैं तो दुकानदार मनमाने दाम वसूलते हैं। कुछ मामलों में एक ही विषय की अलग-अलग वर्कबुक और प्रैक्टिस बुक भी अनिवार्य कर दी गई हैं, जिससे कुल खर्च कई हजार रुपये तक पहुंच रहा है। कमीशन मॉडल की आशंका........ सूत्रों का कहना है कि यह पूरा तंत्र “कमीशन मॉडल” पर आधारित हो सकता है, जहां प्रकाशक और दुकानदार स्कूल प्रबंधन को आर्थिक लाभ पहुंचाते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अभिभावकों के बीच यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि किताबों के चयन में शैक्षणिक गुणवत्ता से ज्यादा आर्थिक हित हावी हैं। छोटे पुस्तक विक्रेताओं को नुकसान............ इस व्यवस्था से शहर के छोटे और स्वतंत्र पुस्तक विक्रेताओं को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जब सप्लाई केवल विशेष दुकानों तक सीमित रहती है तो स्वस्थ प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाती है और बाजार एकाधिकार की ओर बढ़ता है। प्रशासन का सख्त रुख.......... मामले की गंभीरता को देखते हुए जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि गड़बड़ी करने वाले प्रकाशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। उन्होंने कहा है कि यदि जांच में स्कूलों की मिलीभगत पाई जाती है तो संबंधित प्रबंधन पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार की मनमानी या आर्थिक शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुनील साहू / शहबाज / 18 मार्च 2026