मुंबई, (ईएमएस)। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग अब आरटीई के तहत निजी स्कूलों में एडमिशन के लिए सिर्फ एक बार अप्लाई कर सकते हैं। एडमिशन मिलने के बाद वे दूसरी बार अप्लाई नहीं कर पाएंगे, बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने एक मामले में यह अहम फैसला सुनाया है। - क्या है हाई कोर्ट का फैसला? राज्य के संविधान ने देश के हर नागरिक को शिक्षा का अधिकार दिया है। फंडामेंटल राइट्स की परिभाषा में ऐसा प्रावधान किया गया है। हालांकि, एक बार आरटीई के तहत एडमिशन मिलने के बाद अभिभावक बार-बार इसका फायदा उठाने की कोशिश नहीं कर सकते, न्यायाधीश विभा कंकणवाडी और न्यायाधीश हितेन वेणेगांवकर की बेंच ने इस बारे में दिए गए फैसले में यह साफ कर दिया है। हाई कोर्ट ने यह फैसला एक अभिभावक की उस याचिका को खारिज करते हुए दिया है, जिन्होंने एडमिशन मिलने के बाद दोबारा अप्लाई किया था और पास के स्कूल में एडमिशन दिलाने की अपील की थी। अगर आरटीई एडमिशन के लिए दूसरी बार किया गया एप्लीकेशन मंजूर हो जाता है, तो यह अभिभावक को बार-बार अप्लाई करने की इजाजत देने जैसा होगा, जिससे गलत कदम उठाया जाएगा। दरअसल एक बार एडमिशन लेना और फिर मना करना, दूसरे विद्यार्थी के साथ नाइंसाफी करने जैसा है जो वहां एडमिशन लेना चाहता है। क्योंकि उस विद्यार्थी को यहां एडमिशन मिल सकता था, लेकिन उसने यह मौका गंवा दिया। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यह सही नहीं है। * क्या थी याचिका ? - याचिका दाखिल करने वाले अभिभावक के बेटे को आरटीई के तहत एक स्कूल में एडमिशन मिला था। वह स्कूल याचिकाकर्ता के घर से बहुत दूर था। इसलिए, उसने नए सिरे से आरटीई के तहत एडमिशन के लिए अप्लाई किया। बाद में, उसे अपने घर के पास एक निजी स्कूल में एडमिशन मिल गया, लेकिन कागजात की जांच के बाद यह एडमिशन रद्द कर दिया गया। शिक्षा विभाग ने उसका दूसरा सर्टिफिकेट यह कहते हुए कैंसिल कर दिया कि चूंकि उसे पहले आरटीई के तहत एडमिशन मिल चुका है, इसलिए वह नए सिरे से दूसरे स्कूल में एडमिशन का दावा नहीं कर सकता। इसके खिलाफ, इस अभिभावक ने बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच के सामने यह याचिका दाखिल की थी। आरटीई के तहत, निजी स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए 25 फीसदी सीटें रिजर्व करने के लिए मजबूर किया जाता है। यह नियम गरीबों को अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा मिले, यह सुनश्चित करने के लिए बनाया गया है। हाई कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि एक बार एडमिशन लेने के बाद उसी कोटे से दूसरी बार नए एडमिशन के लिए अप्लाई करना सही नहीं होगा। संजय/संतोष झा- १८ मार्च/२०२६/ईएमएस