- विश्व गौरैया दिवस 20 मार्च 26 पर विशेष हर साल 20 मार्च,विश्व गौरैया दिवस हर साल 20 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य शहरीकरण और प्रदूषण के कारण विलुप्त हो रही गौरैया और अन्य छोटे पक्षियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। यह दिवस पहली बार 2010 में नेचर फॉरएवर सोसाइटी (भारत) और फ्रांस की इको-सिस एक्शन फाउंडेशन के सहयोग से मनाया गया था। गोरैया एक छोटी चिड़िया है। यह हल्की भूरे रंग या सफेद रंग में होती है। इसके शरीर पर छोटे-छोटे पंख और पीली चोंच व पैरों का रंग पीला होता है। नर गोरैया का पहचान उसके गले के पास काले धब्बे से होता है। १४ से १६ से.मी. लंबी यह चिड़िया मनुष्य के बनाए हुए घरों के आसपास रहना पसंद करती है। यह लगभग हर तरह की जलवायु पसंद करती है पर पहाड़ी स्थानों में यह कम दिखाई देती है। शहरों, कस्बों गाँवों और खेतों के आसपास यह बहुतायत से पाई जाती है। नर गौरैया के सिर का ऊपरी भाग, नीचे का भाग और गालों पर पर भूरे रंग का होता है। गला चोंच और आँखों पर काला रंग होता है और पैर भूरे होते है। मादा के सिर और गले पर भूरा रंग नहीं होता है। नर गौरैया को चिड़ा और मादा चिड़ी या चिड़िया भी कहते हैं।गौरैया को सामाजिक प्राणी कहा जाता है। वे काॅलनी में रहते हैं जिन्हें आमतौर पर पर झुंड के रूप में वर्णित किया जाता हैं। आमतौर पर गौरैया जमीन पर सीधे चलने की बजाय उछलते हुए चलती हैं। गौरैया जब दुखी होते हैं तो अपने तनाव को कम करने के लिए अपनी पूंछ को बार-बार झटकते हैं। अधिकांश गौरैया सुस्त होते हैं, वो शायद ही कभी अपने जन्मस्थान से 2 किलोमीटर से दूर उड़ते हैं। गौरैया के बहुत कम अंडो में माता-पिता दोनों का डीएनए होता हैं, ज्यादातर में केवल उनके मां का ही डीएनए होता हैं। नर और मादा गौरैया को उनके रंग के आधार पर पहचाना जा सकता हैं, नर गौरैया की पीठ तंबाकू रंग की और गर्दन पर काली पट्टी होती हैं जबकि मादाओं की पीठ और पट्टियाँ दोनो भूरे रंग की होती हैं। गौरैया एक बहुत छोटी पक्षी हैं। औसतन इसकी लंबाई 16 सेमी और वजन 24 से 40 ग्राम होता हैं। गौरैया का घोंसला बनाने की ज़िम्मेदारी नर गौरैयों की होती हैं और घोंसला बनाते समय वे मादा गौरैयों को आकर्षित करने की कोशिश करती हैं। गौरैया की आँखो के रेटिना में प्रति वर्ग मिलीमीटर 4 लाख फोटोरिससेप्टर होते हैं। हर वर्ष 20 मार्च को गौरैया दिवस मनाया जाता हैं ताकि लोंगो में इस नन्हे से पक्षी के प्रति जागरूकता बढ सके। मादा गौरैया एक बार में 3 से 5 बच्चों को जन्म देती हैं, 12 से 15 दिनो के बाद अंडे में से एक गौरैया का जन्म होता है। गौरैया पक्षी पहाड़ी इलाकों में बहुत कम देखने को मिलती हैं। जन्म के 15 दिन बाद ही गौरैया का बच्चा इतना समर्थ हो जाता हैं कि वह घोंसला छोड़ देता हैं। गौरैया ची-ची की मधुर आवाज करती हैं। भोजन की निरंतर आपूर्ति के कारण गौरैया आसानी से मानव बस्तियों में जीवन के अनुकूल हो जाती हैं। ये जीव खाना खाना सीखते हैं जो उन्हें लोगो द्वारा प्रदान किया जाता हैं। इनका गोल पंखो के साथ एक मोटा शरीर होता हैं। इसका शरीर भूरे, काले और सफेद पंखो से ढका होता हैं। गौरैया जंगल में लगभग 4–5 साल तक रहती हैं। यह चिड़िया (गौरैया) यूरोप और एशिया महाद्वीप में पाई जाती हैं। वैज्ञानिको के मुताबिक गौरैयों की लगभग 43 प्रजातियाँ मौजूद हैं। पिछले कुछ सालों में इसकी संख्या में 60 से 80 फीसदी की कमी आई हैं। ईएमएस / 19 मार्च 26