जबलपुर, (ईएमएस)। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय महाकौशल महाविद्यालय में भारतीय नववर्ष (चैत्र प्रतिपदा) के अवसर पर एक व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्कार भारती एवं इतिहास संकलन समिति के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम को सांस्कृतिक और अकादमिक दोनों ही दृष्टियों से विशेष गरिमा प्राप्त हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अलकेश चतुर्वेदी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. अलकेश चतुर्वेदी ने भारतीय नववर्ष की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय कालगणना प्रकृति के चक्रों, विशेषत: वसंत ऋतु के आगमन एवं सौर-चंद्र समन्वय पर आधारित है, जो मानव जीवन के संतुलन और सामंजस्य का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रख्यात उद्योगपति एवं समाजसेवी उदय परांजपे ने कहा कि भारतीय नववर्ष केवल तिथि परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, नवसंकल्प और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पर्व है। संस्कार भारती की अध्यक्ष डॉ. माला सिंह ने भारतीय संस्कृति की अखंडता एवं संस्कारों की महत्ता को रेखांकित करते हुए प्रभावशाली उद्बोधन दिया। निखिल देश, प्रभात दुबे एवं मुंबई विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. कुमार ने भी चैत्र प्रतिपदा के खगोलशास्त्रीय आधार और भारतीय परंपराओं की वैज्ञानिकता पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम संयोजन प्रो. अरुण शुक्ल द्वारा किया गया तथा संचालन डॉ. ममता गुप्ता ने किया। अंत में प्रो. अरुण शुक्ल द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के डॉ. रवीश तमन्ना एवं जागेश्वर प्रजापति की सक्रिय भूमिका रही। कार्यक्रम में उपस्थित सभी विद्यार्थियों एवं प्राध्यापकों को भारतीय नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की गईं। सुनील साहू / मोनिका / 19 मार्च 2026/ 02.19