राज्य
19-Mar-2026


* डॉ. मनीष दोशी बोले—सरकार वादों में फेल, युवाओं को न स्थिर रोजगार, न उचित वेतन अहमदाबाद (ईएमएस)| देश में बेरोजगारी आज सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है। बड़ी संख्या में युवाओं को स्नातक होने के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही, और जो मिलती है वह भी कम वेतन वाली होती है। “डिग्री है लेकिन काम नहीं” जैसी स्थिति गंभीर रूप ले चुकी है। देश में लगभग 1.1 करोड़ स्नातक बेरोजगार हैं और करीब आधे शिक्षित युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पा रहा है। औद्योगिक और सेवा क्षेत्र में रोजगार सृजन की गति बेहद धीमी रहने के कारण स्थिति और चिंताजनक हो गई है। इस मुद्दे पर गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के मीडिया कन्वीनर और प्रवक्ता डॉ. मनीष दोशी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “डेमोग्राफिक डिविडेंड” की बात करने वाली और हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वादा करने वाली सरकार अपने 12 वर्षों में इस लक्ष्य को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी दर पिछले 45 वर्षों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। बेरोजगार युवाओं में लगभग 67 प्रतिशत स्नातक हैं। 19 से 25 वर्ष के स्नातक युवाओं में बेरोजगारी दर 39.33 प्रतिशत है, जबकि 25 से 29 वर्ष के युवाओं में यह लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है। 2017 के बाद से शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2004 से 2023 के बीच हर साल करीब 50 लाख नए ग्रेजुएट्स जुड़ते रहे, जबकि रोजगार के अवसर केवल लगभग 28 लाख ही बढ़े। इनमें से भी मात्र 17 लाख युवाओं को वेतनभोगी नौकरी मिल सकी। इस कारण “ज्यादा ग्रेजुएट्स, कम नौकरियां” जैसी स्थिति पैदा हो गई है, जो युवाओं के भविष्य और आय दोनों के लिए नुकसानदायक है। डॉ. दोशी ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय उन्हें लंबी कतारों में खड़ा रखने में माहिर हो गई है। उनका कहना था कि सरकार के पास इस गंभीर समस्या का कोई ठोस समाधान नहीं है और वह लोगों का ध्यान भटकाने के लिए नए-नए मुद्दे सामने लाती रहती है। गुजरात के संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में 2 लाख से अधिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। 1995 के बाद सरकारी ढांचे में पर्याप्त वृद्धि नहीं की गई, जबकि राज्य की जनसंख्या 4.48 करोड़ से बढ़कर 7.35 करोड़ हो गई है, जो प्रशासनिक असंतुलन को दर्शाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में कॉन्ट्रैक्ट, आउटसोर्सिंग और फिक्स पे जैसी व्यवस्थाओं के जरिए युवाओं का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। लगभग 20 प्रतिशत भर्तियां इसी प्रणाली के तहत की जा रही हैं, जिससे “समान काम के लिए समान वेतन” का सिद्धांत प्रभावित हो रहा है। गुजरात में 2.70 लाख शिक्षित बेरोजगार पंजीकृत हैं, जबकि 25 लाख से अधिक युवा बेरोजगार होने के बावजूद पंजीकृत नहीं हैं। भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और अनियमितताओं के कारण युवाओं में भारी असंतोष फैल रहा है। कई युवा परीक्षा पास करने के बाद वर्षों तक नियुक्ति का इंतजार करते रहते हैं या प्रक्रिया अधर में लटक जाती है। विशेष रूप से TET-TAT परीक्षा पास करने वाले हजारों युवा 2011 से अब तक नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इनमें से कई आयु सीमा पार कर चुके हैं, जिससे उनकी नौकरी की उम्मीदें खत्म होती जा रही हैं। कांग्रेस पार्टी ने मांग की है कि सभी खाली पदों को तुरंत भरा जाए, स्थायी भर्तियां की जाएं, कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्सिंग प्रणाली को समाप्त किया जाए, भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए तथा युवाओं को स्थिर और उचित रोजगार उपलब्ध कराया जाए। सतीश/19 मार्च