भारत में 50 प्रतिशत महिलाएं पी रहीं शराब नई दिल्ली,(ईएमएस)। अमेरिका और भारत में शराब की खपत के रुझान बिल्कुल अलग हैं। स्वास्थ्य चेतना के चलते अमेरिका में खपत ऐतिहासिक रूप से कम हुई है, जबकि भारत में मध्यम वर्ग की वृद्धि और बदलते सामाजिक दृष्टिकोण के कारण खपत करीब दोगुनी हो गई है, जिससे भारत दुनिया के सबसे बड़े शराब बाजारों में से एक बन गया है। चार साल में दुनियाभर में शराब की खपत में तेज गिरावट देखी गई है। अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे बाजारों में डियागो, पर्नोड रिकर्ड, रेमी क्वाइंट्रेयू और ब्राउन फोर्मेन जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर 75 प्रतिशत तक टूटे हैं और उद्योग का मूल्यांकन 74 लाख करोड़ रुपए कम हुआ है। अब ये कंपनियां नॉन-अल्कोहलिक उत्पादों की ओर बढ़ रही हैं। डियाजियो ने ‘रिचुअल जीरो प्रूफ’ खरीदा है, जबकि कार्लसबर्ग और कंपारी-मिलानो ने भी इसतरह के ब्रांड लांच किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 50 प्रमुख शराब ब्रांडों के शेयर जून 2021 से औसतन 46 प्रतिशात गिरे हैं। वहीं, भारत में शराब की खपत लगातार बढ़ रही है। 2005 में प्रति व्यक्ति खपत 2.4 लीटर से बढ़कर 2016 में 5.7 लीटर हो गई, 2030 तक 6.7 लीटर तक पहुंचने का अनुमान है। भारत का शराब बाजार 60 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। चार साल में यूनाइटेड स्पिरिट्स, रेडिको खेतान और ग्लोबस स्पिरिट्स के शेयर 14 गुना बढ़े हैं। राज्यों को शराब बिक्री से 19,730 करोड़ राजस्व मिला है। क्या कारण रहे? रिपोर्ट के अनुसार, देश की 60 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम है, जिससे शराब बाजार बढ़ रहा। डब्ल्यूएचओ ग्लोबल रिपोर्ट’ में पाया गया कि भारत में महिलाओं में शराब खपत बीते दो दशकों में 50 प्रतिशत बढ़ी है। रिसर्च कहती हैं कि भारत में औसत आय में 30 प्रतिशत वृद्धि हुई है, इसी के साथ ब्रांडेड और प्रीमियम शराब की मांग सालाना 18 प्रतिशत बढ़ रही। वहीं अमेरिका में लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं, जिसके कारण शराब की खपत में गिरावट आई है। अमेरिका में 86 वर्षों में शराब पीने वालों की संख्या सबसे कम स्तर पर पहुँच गई है। ड्रंक ड्राइविंग और सार्वजनिक नशा के खिलाफ कड़े नियम लागू किए गए हैं। भारत में स्थिति प्रति व्यक्ति शराब की खपत 2005 में 2.4 लीटर से बढ़कर 2016 में 5.7 लीटर हो गई और 2030 तक 6.7 लीटर तक पहुँचने का अनुमान है। 2020 से 2025 के बीच भारत में शराब की खपत लगभग दोगुनी हो गई है। लोग अब सस्ती शराब के बजाय प्रीमियम ब्रांड्स (महंगी शराब) की ओर रुख कर रहे हैं। पीने की उम्र कम होने और सामाजिक रूप से शराब स्वीकार्य होने के कारण खपत बढ़ रही है। आशीष/ईएमएस 20 मार्च 2026