राष्ट्रीय
20-Mar-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय सशस्त्र बलों में आर्मी, नेवी और एयरफोर्स की सभी कमांड को मिलाकर थिएटर कमांड बनाने की प्रक्रिया अब तक के सबसे बड़े संरचनात्मक बदलावों में से एक होगी। यह बदलाव लंबे समय से चर्चा में है और इस आधुनिक मल्टी-डोमेन वॉरफेयर और युद्ध की बदलती परिस्थितियों के मद्देनजर लागू किया जा रहा है। केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने संसद की रक्षा मामलों की स्टैंडिंग कमिटी को बताया कि इस पर सभी संबंधित पक्षों के बीच सहमति बन चुकी है, जबकि कुछ अहम मुद्दों पर अभी चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी (सीओएससी) में अंतिम चर्चा चल रही है। थिएटर कमांड के गठन का मुख्य उद्देश्य सैन्य ऑपरेशन्स की दक्षता बढ़ाना है। इसके तहत ‘फोर्स एप्लिकेशन’ (ऑपरेशन में बल का इस्तेमाल) और ‘फोर्स जेनरेशन’ (बल की तैयारी और संसाधन जुटाना) के काम अलग किए जाएंगे। इससे थिएटर कमांडर पूरी तरह ऑपरेशनल जिम्मेदारियों पर ध्यान दे सकते है। रणनीतिक और ऑपरेशनल स्तर की योजना में बदलाव करके एक कमांडर को पूरी जिम्मेदारी देने से कमान में यूनिटी ऑफ कमांड आएगी और कार्यों का तालमेल बेहतर होगा। इस अहम परियोजना की जिम्मेदारी मौजूदा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान के पास है। उनका कार्यकाल 30 मई को समाप्त हो रहा है। 30 सितंबर 2022 को सीडीएस बने जनरल चौहान के पहले कार्यों में थिएटर कमांड का गठन शामिल था, लेकिन अब तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस बदलाव की जरूरत पर बहस और तेज हुई थी। वर्तमान में भारतीय सशस्त्र बलों में कुल 17 सिंगल सर्विस कमांड हैं। भारतीय सेना के पास 6 ऑपरेशनल और 1 ट्रेनिंग कमांड, भारतीय वायु सेना के पास 5 ऑपरेशनल, 1 ट्रेनिंग और 1 मेंटेनेंस कमांड, और भारतीय नौसेना के पास 2 ऑपरेशनल और 1 ट्रेनिंग कमांड है। इन सभी कमांड की कमान अपने-अपने कमांडर-इन-चीफ के पास होती है। इसके अलावा, आईडीएस के तहत अंडमान और निकोबार के लिए एक संयुक्त कमांड भी है। थिएटर कमांड बनने के बाद यह संरचना एकीकृत हो जाएगी, जिससे सशस्त्र बलों की संचालन क्षमता और युद्ध तैयारियों में सुधार होगा। इस परिवर्तन से भारतीय सैन्य रणनीति में व्यापक सुधार और आधुनिक युद्ध प्रणालियों के साथ तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी। आशीष दुबे / 20 मार्च 2026