नई दिल्ली (ईएमएस)। फेफड़ों और पेड़ों की शाखाओं में प्रकृति का गणितीय रहस्य छिपा है। यह केवल संयोग नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रकृति का अद्भुत गणित और कुशल इंजीनियरिंग छिपी हुई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हुई, जिसमें इंसानों की श्वसन प्रणाली और पेड़ों की शाखाओं की संरचना के बीच समानता दिखाई गई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह समानता केवल देखने में ही आकर्षक नहीं है, बल्कि इसके पीछे ऊर्जा की बचत और अधिकतम दक्षता का वैज्ञानिक सिद्धांत भी काम करता है। जीव विज्ञान में इसे मुरेज लॉ के नाम से जाना जाता है। यह सिद्धांत बताता है कि प्रकृति में शाखाओं का नेटवर्क, चाहे वह रक्त वाहिकाएं हों, पेड़ों की टहनियां हों या नदियों का तंत्र, सभी को इस तरह व्यवस्थित किया जाता है कि उनमें बहने वाले तत्व कम से कम ऊर्जा खर्च करते हुए आगे बढ़ सकें। इस नियम के अनुसार एक मुख्य शाखा और उससे निकलने वाली छोटी शाखाओं की मोटाई के बीच एक सटीक गणितीय संबंध होता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि रक्त, पानी या पोषक तत्व जैसी चीजें पूरे नेटवर्क में संतुलित और कुशल तरीके से प्रवाहित हो सकें। इसे एक सुव्यवस्थित हाइवे सिस्टम की तरह भी समझा जा सकता है, जहां मुख्य सड़क चौड़ी होती है और छोटी गलियां उससे निकलती हैं, लेकिन कुल यातायात क्षमता संतुलित बनी रहती है। इस सिद्धांत को वैज्ञानिक रूप से वर्ष 1926 में शरीर विज्ञानी सेसिल डी मुरे ने विस्तार से समझाया था। इसी नियम के कारण मानव फेफड़ों की संरचना बार-बार शाखाओं में विभाजित होती है। बताया जाता है कि फेफड़े लगभग 23 बार शाखाओं में विभाजित होकर करीब 48 करोड़ छोटे वायु कोष यानी एयर सैक्स बनाते हैं, जिससे शरीर तक ऑक्सीजन का प्रभावी तरीके से संचार संभव हो पाता है। पेड़ों और फेफड़ों के बीच संबंध केवल उनकी बनावट तक सीमित नहीं है। पेड़ वातावरण में ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जिसे मनुष्य सांस के रूप में ग्रहण करता है, जबकि मनुष्य कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है, जो पेड़ों के लिए आवश्यक होती है। इसी वजह से घने जंगलों और वर्षावनों को अक्सर धरती के ‘फेफड़े’ कहा जाता है, क्योंकि वे वातावरण से प्रदूषकों को सोखकर पृथ्वी को सांस लेने योग्य बनाए रखते हैं। प्रकृति में बार-बार दिखाई देने वाले ऐसे जटिल लेकिन सुंदर पैटर्न को विज्ञान की भाषा में फ्राक्टाल्स कहा जाता है। चाहे वह बर्फ के क्रिस्टल हों, नदियों के डेल्टा हों या पेड़ों की शाखाएं, इन सबके पीछे एक समान गणितीय सिद्धांत काम करता है। सुदामा/ईएमएस 21 मार्च 2026