राज्य
22-Mar-2026
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भोपाल (ईएमएस)। राज्य लघु वनोपज संघ सूचना का अधिकार लागू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक एवं पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ राजेंद्र सिंह ने बीते विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि यह संघ लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत कार्य कर रहा है। तत्काल सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 लागू किया जाए। सूचना का अधिकार अधिनियम लागू नहीं होने से लघु वनोपज संघ में व्यापक आर्थिक अनियमितताएं हो रही है और जवाबदेही है ही नहीं। हालांकि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सदन में हो-हल्ले के बीच चर्चा नहीं हो सकी थी। डॉ सिंह ने सरकार को दिए गए ध्यान आकर्षण सूचना में उल्लेख किया कि मध्य प्रदेश शासन की 40 करोड़ रूपों की अंश पूंजी से स्थापित है। संघ का संचालन एवं प्रबंधन में शासन के ही भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय वन सेवा और राज्य प्रशासनिक वन सेवा के अधिकारी कार्य करते हैं। यह संघ राज्य एवं केंद्र की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त करोड़ रूपयों की राशि का उपयोग करता है, जो विभिन्न कार्यों में व्यय होती है। व्यापार व विपणन में स्पष्ट पारदर्शिता होनी चाहिए जो इस संघ में नहीं है। यह सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 इस संघ पर लागू नहीं किया गया है जो की खुल्लम-खुल्ला नियम विरुद्ध है। किस आदेश पर मिली छूट? डॉ सिंह ने सदन में दिए गए ध्यान आकर्षण सूचना में सरकार से सवाल किया कि संघ को विशेष छूट किस आदेशों के तहत मिली है उसकी, एक प्रति उपलब्ध करायें। जबकि वर्तमान में प्रमुख सचिव वन इसके अध्यक्ष है और शासन द्वारा निर्धारित नियम प्रक्रिया के तहत राज्य लघु वनोपज संघ कार्यकर्ता है। शासन की पूंजी से स्थापित होने और शासन का सीधा हस्तक्षेप होने पर भी भी इस संघ में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 लागू नहीं है। पारदर्शिता बेहद जरूरी है राज्य सूचना आयोग के निर्देशन के बाद भी इस संघ में सूचना का अधिकार अधिनियम क्यों लागू नहीं किया गया है? पारदर्शिता के अभाव आर्थिक अनियमितता डॉ सिंह का कहना है कि लघु वनोपज संघ की स्थापना आदिवासियों के हितों के लिए और उनके उत्थान के लिए की गई थी। इसलिए पारदर्शिता बेहद जरूरी है कि संघ में सूचना का अधिकार लागू हो। पारदर्शिता के अभाव में पूरे संघ में व्यापक आर्थिक अनियमितताएं हो रही है जवाबदेही है ही नहीं। यह संघ लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत कार्य कर रहा है। संघ आदिवासियों एवं वनवासियों से जड़ी-बूटी की खरीदी न कर औषाधि बनाने के नाम पर अधिकारियों की मन-पसंद व्यवसायिक कम्पनियों से खरीदी हो रही है। यही नहीं वन मेले में अब आदिवासियों द्वारा एकत्रित जड़ी-बूटियां की दुकाने कम और ब्रांडेड कम्पनियों की दुकाने अधिक दिखाई देती है। जबकि मेले आयोजित करने का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश के आदिवासियों द्वारा एकत्रित जड़ी-बूटियों का बाजार उपलब्ध कराना है ताकि उनका आर्थिक जीवन में गुणात्मक सुधार हो। उमंग सिंघार ने भी लिखा पत्र नेता-प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रमुख सचिव सहकारिता को पत्र लिखकर कहा है कि आदिवासियों के हितों कि रक्षा के लिए लघु वनोपज संघ में सूचना का अधिकार अधिनियम लागू किया जाय। उन्होंने अपने पत्र में 2005 का अधिनियम सार्वजनिक प्राधिकरण को परिभाषित करते हुए कहा है कि किसी भी स्व-शासित प्राधिकरण, निकाय या संस्था से है, जिसकी स्थापना या गठन निम्न प्रकार से किया गया हो: (a) संविधान द्वारा या उसके अधीन। (b) संसद द्वारा बनाए गए किसी अन्य कानून द्वारा (c) राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए किसी अन्य कानून द्वारा; (d) सरकार द्वारा जारी अधिसूचना या आदेश द्वारा स्वामित्व, नियंत्रण या पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकाय में लागू होगी।