ज़रा हटके
23-Mar-2026
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बीजिंग (ईएमएस)। एक भारतीय महिला अपने पति के साथ पिछले आठ वर्षों से चीन में रह रही है। महिला का पति भी चीन का ही रहने वाला है, इसके बावजूद वह अपने बेटे का दाखिला किसी अच्छे किंडरगार्टन में नहीं करा पाई। आखिरकार महिला अपने बच्चे को लेकर भारत लौटने का फैसला कर चुकी है। चीन की शिक्षा प्रणाली की जटिलता और प्रतिस्पर्धा को यह मामला उजागर करता है। चीन में शिक्षा को बेहद गंभीरता से लिया जाता है और यहां एडमिशन प्रक्रिया काफी सख्त मानी जाती है। कई माता-पिता बच्चे के जन्म से पहले ही स्कूलों की तलाश शुरू कर देते हैं। यहां एडमिशन केवल आवेदन फॉर्म या परीक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि ‘हुकौ’ नामक स्थानीय निवास पंजीकरण प्रणाली पर आधारित होता है। यह सिस्टम तय करता है कि बच्चे को किस क्षेत्र के किस स्कूल में प्रवेश मिलेगा। यदि परिवार के पास उस इलाके का ‘हुकौ’ नहीं है, तो सरकारी स्कूल में दाखिला मिलना लगभग असंभव हो जाता है। इसके अलावा, ‘स्कूल डिस्ट्रिक्ट हाउस’ का चलन भी चीन में काफी प्रचलित है। लोग अच्छे स्कूलों के आसपास घर खरीदने के लिए भारी रकम खर्च करते हैं, क्योंकि एडमिशन के लिए प्रॉपर्टी दस्तावेज और स्थानीय पहचान अनिवार्य होते हैं। कई प्रतिष्ठित स्कूलों में यह नियम भी है कि परिवार को उस क्षेत्र में कम से कम एक से तीन साल तक रहना जरूरी है। ‘जिन्जिन रूक्स्यू’ नीति के तहत बच्चों को पास के स्कूल में ही प्रवेश दिया जाता है। चीन में सरकारी और निजी स्कूलों के बीच भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। सरकारी स्कूलों में फीस कम होती है और अनुशासन सख्त होता है, लेकिन यहां प्रवेश के लिए स्थानीय नियमों का पालन अनिवार्य है। वहीं, निजी और इंटरनेशनल स्कूलों में सुविधाएं बेहतर होती हैं और एडमिशन अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन उनकी फीस काफी अधिक होती है। किंडरगार्टन स्तर पर निजी स्कूलों की फीस लाखों रुपये तक पहुंच सकती है, जबकि इंटरनेशनल स्कूलों में सालाना खर्च 15 से 30 लाख रुपये तक हो सकता है। ऐसे में अधिकतर विदेशी अभिभावक इंटरनेशनल स्कूलों को प्राथमिकता देते हैं, जहां अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा दी जाती है और हुकौ की अनिवार्यता नहीं होती। विदेशी नागरिकों के लिए एडमिशन प्रक्रिया थोड़ी अलग होती है। बड़े शहरों में कुछ सरकारी स्कूल विदेशी बच्चों को प्रवेश देते हैं, लेकिन वहां पढ़ाई का माध्यम पूरी तरह मंदारिन भाषा होता है। सुदामा/ईएमएस 23 मार्च 2026