वाशिंगटन (ईएमएस)। फैटी लिवर की समस्या को आमतौर पर लोग शराब के सेवन से जोड़कर देखते हैं, लेकिन अब बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं जो शराब नहीं पीते। इसे नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर कहा जाता है और इसके मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब लिवर में जमा चर्बी उसकी कुल वजन का लगभग 5 से 10 प्रतिशत से ज्यादा हो जाती है, तब लिवर के लिए सामान्य रूप से काम करना मुश्किल हो जाता है। फैटी लिवर के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन इनमें से एक बड़ा जोखिम कारक टाइप 2 डायबिटिज भी है। डॉक्टरों का कहना है कि टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित कई मरीजों में फैटी लिवर की समस्या देखने को मिलती है। कुछ मामलों में टाइप 1 डायबिटिज के मरीजों में भी यह समस्या पाई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज और फैटी लिवर के बीच संबंध का मुख्य कारण इंसुलिन रेसिसटेंस है। डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे खून में मौजूद शुगर कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाती। इस स्थिति में शरीर में फैट के टूटने की प्रक्रिया बढ़ जाती है और अतिरिक्त चर्बी खून के माध्यम से सीधे लिवर में पहुंचकर वहां जमा होने लगती है। यही कारण है कि डायबिटीज के मरीजों में फैटी लिवर होने की संभावना अधिक रहती है। डॉक्टरों का कहना है कि केवल डायबिटीज ही नहीं, बल्कि कई अन्य कारण भी फैटी लिवर का खतरा बढ़ाते हैं। पेट के आसपास जमा चर्बी लिवर के लिए सबसे बड़ा खतरा मानी जाती है। इसके अलावा कोल्ड ड्रिंक, सोडा और पैकेज्ड मीठे खाद्य पदार्थों में मौजूद हाई फ्रुक्टोज भी लिवर में फैट जमा करने का काम करता है। अगर किसी व्यक्ति का कोलेस्ट्रॉल या ब्लड प्रेशर अधिक रहता है, तो इससे लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और फैटी लिवर की संभावना बढ़ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज और फैटी लिवर एक-दूसरे से जुड़े हुए रोग हैं। यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज है, तो उसके फैटी लिवर से ग्रस्त होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं यदि किसी को फैटी लिवर हो जाए, तो उसके शरीर में शुगर लेवल नियंत्रित रखना भी मुश्किल हो सकता है। समस्या की गंभीरता यह है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, जिससे कई लोगों को इसका पता देर से चलता है। यदि समय पर इलाज न किया जाए तो लिवर में सूजन बढ़ सकती है और स्थिति आगे चलकर लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकती है। डॉक्टरों के अनुसार इस समस्या से बचने के लिए जीवनशैली में सुधार करना बेहद जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति अपने कुल वजन का लगभग 7 से 10 प्रतिशत तक कम कर ले, तो लिवर में जमा चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसके साथ ही चीनी और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना चाहिए और कोल्ड ड्रिंक या ज्यादा मीठे पेय पदार्थों से बचना चाहिए। रोजाना कम से कम 30 मिनट पैदल चलना या व्यायाम करना भी शरीर में इंसुलिन के काम करने की क्षमता को बेहतर बनाता है, जिससे लिवर में फैट जमा होने का खतरा कम हो जाता है। बता दें आज के समय में लिवर से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें फैटी लिवर की समस्या सबसे आम मानी जा रही है। जब लिवर में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है, तो इस स्थिति को फेटी लीवर डिजिज कहा जाता है। सुदामा/ईएमएस 22 मार्च 2026