व्यापार
23-Mar-2026


नई दिल्ली(ईएमएस)। ईरान,इजराइल और अमेरिका की जंग को करीब एक महीना होने वाला है। इससे दुनिया के तमाम देशों को भारी नुकसान हुआ है। भारत और रुस की बात करें तो दोनों देशों का साढ़े 9 लाख करोड़ से अधिका का कारोबार संकट में पड़ा हुआ है। चाबहार बंदरगाह के बाद अब ईरान के प्रमुख पोर्ट सिटी बंदर-ए-अंजली पर हुए एरियल अटैक ने भारत के लिए एक नया संकट खड़ा कर दिया है। यह शहर भारत और रूस द्वारा विकसित किए जा रहे इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर का सबसे अहम केंद्र माना जाता है। बंदर-ए-अंजली पर हुए इन हमलों ने भारत और रूस के बीच साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर (लगभग 9 लाख करोड़ रुपये) तक ले जाने के लक्ष्य को बड़ा झटका दिया है। कैस्पियन सागर के तट पर स्थित यह बंदरगाह रूस-ईरान व्यापार और भारत से आने वाले माल के लिए एक प्रमुख लॉजिस्टिक हब है। 18 मार्च को हुए हमले में कस्टम हाउस समेत कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को नुकसान पहुँचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले से विश्वसनीयता और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे भविष्य में माल ढुलाई और बीमा की दरों में भारी वृद्धि होना तय है। लगभग 7200 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर मुंबई को सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ता है। यह स्वेज नहर के पारंपरिक मार्ग को बाईपास करते हुए एशिया और यूरोप के बीच व्यापार को सस्ता और तेज बनाने के लिए तैयार किया गया था। इस मल्टी-मोडल नेटवर्क के जरिए माल ढुलाई का समय 25-30 दिनों से घटकर मात्र 7 दिन रह जाता है। अब तक सुरक्षित माने जाने वाले इस रूट पर सैन्य हमलों से मध्य एशियाई देशों की व्यापारिक योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं। इसके अतिरिक्त, होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में बढ़ते तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल आपूर्ति के लिए भी चुनौती पैदा कर दी है। इस गंभीर स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर चर्चा कर महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों पर हो रहे हमलों की निंदा की है। भारत ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया है। वहीं, रूस ने भी इसे अपनी प्राथमिक परियोजनाओं पर बड़ा प्रहार माना है। इस कॉरिडोर की भविष्य की रणनीति पर चर्चा के लिए मॉस्को में एक उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की जा रही है। अगर इन हमलों पर लगाम नहीं लगी, तो यह न केवल भारत-रूस संबंधों बल्कि वैश्विक व्यापार के लिए अपूरणीय क्षति साबित हो सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस 23 मार्च 2026