राष्ट्रीय
23-Mar-2026
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बंगाल चुनाव में हुमायूं की पार्टी से गठबंधन को लेकर कांग्रेस समेत कई दलों ने साधा निशाना नई दिल्ली,(ईएमएस)। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के घोषणा करने के बाद कि उनकी पार्टी पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी नेता हुमायूं कबीर की नवगठित आम जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन में लड़ेगी। इसको लेकर सोमवार को कांग्रेस ने कहा कि धन्यवाद ओवैसी। आपने अपना धर्मनिरपेक्षता का मुखौटा हटा दिया है और दुनिया को अपना असली सांप्रदायिक चेहरा दिखा दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि ओवैसी ने खुद को बीजेपी की “बी-टीम” ही नहीं बल्कि उसका “सच्चा साथी” भी साबित कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने एआईएमआईएम-एजेयूपी गठबंधन की आलोचना करते हुए कहा कि धन्यवाद, असदुद्दीन ओवैसी। आपने अपना धर्मनिरपेक्षता का मुखौटा हटा दिया है और दुनिया को अपना असली सांप्रदायिक चेहरा दिखा दिया है। उन्होंने कहा कि आपने यह भी दिखा दिया कि आप न सिर्फ बीजेपी की बी-टीम हैं, बल्कि उसके सच्चे साथी भी हैं। लोग हुमायूं कबीर पर आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने पार्टी बनाने के लिए पैसा लिया है। तो क्या आपको दिल्ली से फंड मिल रहा है? जनता सब समझती है और वह आपको पश्चिम बंगाल के साथ-साथ हैदराबाद के चुनावों में भी आपकी स्थिति दिखा देगी। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी इस मुद्दे पर कहा कि जहां भी धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा होता है, उसका फायदा बीजेपी को ही मिलता है। ओवैसी इसके लिए जाने जाते हैं और उन पर अक्सर ऐसे आरोप लगते हैं। वह निश्चित रूप से ऐसी रणनीति अपनाते हैं ताकि वोटों का विभाजन हो सके। इसलिए हम कहते हैं कि वह बीजेपी की बी-टीम के रूप में काम करते हैं। वहीं झामुमो के प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि मुझे लगता है कि अब ओवैसी को एक-दो राज्यों में कुछ सफलता मिली है। उन्होंने बीजेपी को मजबूत किया है और धर्मनिरपेक्ष दलों व ताकतों को कमजोर किया है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है। मुझे लगता है कि बंगाल की राजनीति के संदर्भ में वह कहीं फिट नहीं बैठेंगे। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने तंज कसते हुए कहा कि चाहे वह हुमायूं कबीर हों या ओवैसी, सच्चाई यह है कि ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में जो जहर बोया है, उसने ऐसे कई किरदार पैदा किए हैं जो उसी जहर को बढ़ाने का काम कर रहे हैं। जब एक स्वाभाविक विकल्प मौजूद है, तो ऐसे तत्वों का कोई महत्व नहीं रहेगा और इन चुनावों में उनका अस्तित्व मायने नहीं रखेगा। इस बीच बिहार के मंत्री रामकृपाल यादव ने अपेक्षाकृत संतुलित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह ओवैसी की पार्टी है और अगर वह चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह उनका स्वतंत्र निर्णय है। पार्टी अपने संगठन का विस्तार करना चाहती है और कई जगहों पर उसकी मौजूदगी है। ओवैसी ने चुनाव लड़ने का फैसला किया है और एक लोकतांत्रिक पार्टी होने के नाते उसके नेता उसी अनुसार काम करते हैं। बता दें 294 सदस्यीय बंगाल विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और दूसरा 29 अप्रैल को होगा और मतगणना 4 मई को होगी। सिराज/ईएमएस 23मार्च26 ------------------------------