23-Mar-2026


:: जीआईएस आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान से अब तथ्यों पर होंगे निर्णय; 12 फरवरी को मुख्यमंत्री ने किया था शुभारंभ :: भोपाल/इंदौर (ईएमएस)। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश की अधोसंरचना विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी तकनीकी पहल करते हुए अपनी कार्यप्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और वैज्ञानिक बना दिया है। विभाग द्वारा विकसित “लोक निर्माण सर्वेक्षण एप” और जीआईएस आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान के माध्यम से अब सड़कों, पुलों और भवनों का प्रमाणिक डेटा संकलित किया जा चुका है। पूर्व में सटीक डेटा के अभाव में योजनाएं अक्सर अनुमान के आधार पर बनानी पड़ती थीं, किंतु अब विभाग ने वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए सुधार की नई नींव रखी है। इस नवाचार के तहत संचालित तीन दिवसीय विशेष सड़क सर्वेक्षण अभियान में विभाग के अभियंताओं ने स्वयं मैदान में उतरकर सड़कों की चौड़ाई, पेवमेंट के प्रकार, राइट ऑफ वे, शोल्डर और वर्तमान स्थिति जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी मापदंडों का डिजिटल डेटा संकलित किया। इस व्यापक डिजिटल सर्वेक्षण के परिणामस्वरूप अब तक विभाग के पास 71,210 किलोमीटर से अधिक सड़कों, 2,975 शासकीय भवनों तथा 1,426 पुलों का अद्यतन और प्रमाणिक डेटा उपलब्ध हो गया है। इस प्रक्रिया के दौरान नगरीय निकाय, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और अन्य एजेंसियों की सड़कों के साथ लोक निर्माण विभाग की सीमाओं को भी स्पष्ट रूप से चिन्हित किया गया है। प्रमाणिक डेटा उपलब्ध होने के बाद विभाग ने भास्कराचार्य संस्थान के तकनीकी सहयोग से प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल पर जीआईएस आधारित रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके लिए एक विशेष “मास्टर प्लान मॉड्यूल” विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से पर्यटन स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी का वैज्ञानिक विश्लेषण कर भविष्य की योजनाएं तैयार की जा सकेंगी। मुख्यमंत्री द्वारा 12 फरवरी 2026 को शुभारंभ किए गए इस महत्वाकांक्षी रोड नेटवर्क मास्टर प्लान को प्रदेश में सड़क विकास की दिशा तय करने वाला एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। लोक निर्माण विभाग की यह पहल केवल एक योजना मात्र नहीं है, बल्कि यह तकनीक आधारित दीर्घकालिक दृष्टि का परिचायक है। डेटा एनालिटिक्स और आधुनिक तकनीकों के इस समन्वय से भविष्य में सड़क निर्माण और उन्नयन की योजनाएं अधिक पारदर्शी, प्रभावी और वैज्ञानिक बनेंगी। तकनीक आधारित सुशासन की दिशा में विभाग का यह कदम सुदृढ़ अधोसंरचना विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रहा है, जिससे अब विकास के निर्णय अनुमान के बजाय ठोस तथ्यों पर आधारित होंगे। प्रकाश/23 मार्च 2026