:: ओरछा, चित्रकूट और पन्ना सहित विभिन्न शहरों में 27 मार्च को होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम; नि:शुल्क रहेगा प्रवेश :: भोपाल/इंदौर (ईएमएस)। मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से नई पीढ़ी को अवगत कराने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग द्वारा आगामी श्रीरामनवमी के पावन अवसर पर भव्य प्राकट्य पर्व का आयोजन किया जा रहा है। शुक्रवार, 27 मार्च 2026 को प्रदेश के सात प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर श्रीराम केंद्रित नृत्य नाटिका, लोक गायन और भक्ति संगीत के विविध कार्यक्रमों का मंचन होगा। इन कार्यक्रमों का आयोजन ओरछा धाम (निवाड़ी), भरत घाट चित्रकूट (सतना), श्रीराम जानकी मंदिर शहडोल, मंगल भवन परिसर उमरिया, जुगल किशोर मंदिर प्रांगण पन्ना, सीतामढ़ी कोतमा (अनूपपुर) और अहमदपुर-बरेली (रायसेन) में सायंकाल 7 बजे से किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन सभी आयोजनों में आम जनमानस का प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क रहेगा, ताकि अधिक से अधिक लोग भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों और स्थानीय जनश्रुतियों से जुड़ सकें। ओरछा धाम के राम राजा मंदिर प्रांगण में होने वाले मुख्य आकर्षणों में छतरपुर की मुस्कान प्रजापति द्वारा बुंदेली लोक गायन, मांडवी अजय आरोणकर के निर्देशन में नृत्य नाटिका और विदिशा की सौम्या शर्मा द्वारा भक्ति गायन की प्रस्तुति दी जाएगी। वहीं, चित्रकूट के भरत घाट पर मऊगंज की स्नेहा मिश्रा बघेली लोक गायन पेश करेंगी, जिसके बाद ग्वालियर की तरुणा सिंह के निर्देशन में नृत्य नाटिका और उज्जैन के सुविख्यात शर्मा बंधुओं द्वारा भक्ति भजनों की गंगा बहाई जाएगी। शहडोल के पंचायती मंदिर में रीवा की रीता तिवारी के गायन के साथ ही खंडवा के कलाकारों द्वारा हनुमान लीला का मंचन किया जाएगा और भोपाल की भारती विश्वनाथन भक्ति गायन प्रस्तुत करेंगी। उमरिया, पन्ना और कोतमा में भी क्षेत्रीय कलाकारों का जमावड़ा रहेगा। उमरिया में मुनीन्द्र मिश्रा के बघेली गायन और डॉ. नेहा विश्वकर्मा की नृत्य नाटिका के साथ सिवनी की पल्लवी तिवारी सुर सजाएंगी। पन्ना के जुगल किशोर मंदिर में छतरपुर की खुशी तिवारी बुंदेली गायन और मनस्वी भोजने नृत्य नाटिका पेश करेंगी, जबकि सागर के यश गोपाल श्रीवास्तव भक्ति गायन करेंगे। अनूपपुर के कोतमा में सीधी के अजय कुमार के बघेली गायन और अरविंद कुमार पटेल के निर्देशन में रामलीला का मंचन होगा, वहीं वाराणसी के सुजीत तिवारी भक्ति गीतों की प्रस्तुति देंगे। संस्कृति विभाग का यह प्रयास धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक आख्यानों को आधुनिक मंच प्रदान कर जन-जन तक पहुँचाने का एक महत्वपूर्ण सोपान है। प्रकाश/23 मार्च 2026