लेख
24-Mar-2026
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(25 मार्च को जन्मदिन पर विशेष) अपने कुशल नेतृत्व से विश्व को आकर्षित करने वाले देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आदर्श, सिद्वांत उन लोगों के लिये प्रेरक संदेश हैं जो राजनीति को देश सेवा का माध्यम नहीं मानते। मोदी जी ने राजनीतिक मूल्यों, सिद्धांतों को जिस जीवटता के साथ अपनाया है उसके कायल सिर्फ भारत के ही नहीं बल्कि विश्व के अनेक देशों के लोग हैं। उन्हीं के पद्चिन्हों पर चलने वाले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॅा मोहन यादव का जड़ और जमीन से गहरा नाता रहा है। दूरदर्शी सोच, निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता और सरल, सौम्य व्यक्तित्व के कारण वे अल्प समय में ही सबके चहेते और विश्वासपात्र बन गये हैं। उनकी कार्यप्रणाली सबसे जुदा और पारदर्शी है। प्रदेश के लोग मान बैठे हैं कि डॉ मोहन यादव के हाथों में उनका भविष्य सुरक्षित है। राजनीतिक घटनाक्रम और प्रदेश के सामाजिक आर्थिक हालात पर पैनी नजर रखने वालों का स्पष्ट मानना है कि डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश विकास के रास्ते पर निरंतर आगे बढ़ रहा है, स्वर्णिम मध्यप्रदेश का सपना जो कभी प्रदेश के लोगों की आँखों में बसा था उसे साकार होते देखा जा रहा है। प्रसंगवश बता दें कि लगभग सवा दो साल पहले जिस दिन मोहन यादव मुख्यमंत्री बने थे, तब से लेकर अब तक उन्होंने लोकप्रियता हासिल करने का सस्ता उपक्रम नहीं किया बल्कि सबको विस्मय में डालने वाले कटु फैसले भी लिये। याद दिलाना होगा कि वे ऐसे मामले रहे थे जिन पर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सिर्फ विचार विमर्श ही किया, फैसले लेने की हिम्मत कोई जुटा नहीं सका था। उन लोगों ने सिर्फ अपनी कुर्सी की चिंता की, जनता से किये वायदों से मुकर गये। उनके विपरीत डॉ मोहन यादव एक ऐसे मुख्यमंत्री हैं जो प्रदेश के सामान्य व्यक्ति की भी फिक्र करते हैं। आमजन के बीच उनका सामंजस्य निरंतर बना हुआ है। उनके आलोचकों को मुहँ की खानी पड़ी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आदर्श मानकर अपने प्रदेश के हित में सदा प्रयत्नशील रहने वाले डॉ मोहन यादव की जन्मस्थली और कर्मस्थली वह उज्जैन नगरी है जहाँ महाकाल विराजते हैं। महाकाल का आर्शीवाद उन्हें प्राप्त है तभी तो काफी कम समय में ही उन्होंने सफलता की विभिन्न ऊचाँइयों को स्पर्श किया। 25 मार्च 1965 को उज्जैन के कृषक परिवार में जन्में मोहन यादव अपने अध्ययन के दिनों से ही संघ की गतिविधियों से प्रभावित थे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ने का यह बड़ा कारण रहा था। विभिन्न पदों पर रहते हुए उन्हें वर्ष 2004 में सिंहस्थ आयोजन में बड़ी जिम्मेदारी मिली तो उनकी लोकप्रियता को गति मिली। उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पद पर कार्य करने के बाद उन्हें मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम का अध्यक्ष भी बनाया गया। यहाँ जिस जीवटता के साथ उन्होंने कार्य किया वह उल्लेखनीय बन गया। वर्ष 2013 में प्रथम बार विधायक तथा 2020 में उच्च शिक्षा मंत्री बनाये गये। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में अनेक नवाचार हुए। अब वह समय आ गया था जब मोहन यादव की गिनती प्रदेश के दिग्गज नेताओं में होने लगी। समय गुजरता गया और उनकी सक्रियता बढ़ती गयी। वर्ष 2023 के विधान सभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को मिली प्रचंड जीत के बाद डॉ मोहन यादव को मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया। प्रदेश में अपनी सक्रियता निरंतर बरकरार रखते हुए तथा सबके विश्वासपात्र बनकर आज वे एक सफल मुख्यमंत्री के रूप में हमारे बीच हैं। उनकी कर्त्व्य परायणता और परिश्रम के परिणाम मिलने शुरू हो गयें हैं। प्रदेश के लोगों से किये वायदे पूरे होते देखे गये हैं। उनके काम में पारदर्शिता और गंभीरता का ही सुफल है कि स्वर्णिम मध्यप्रदेश की अवधारणा पूरी हो रही है। महिला सम्मान के लिये किये गये उनके प्रयास अकसर सराहे जाते हैं। हाल ही में मध्यप्रदेश के बजट में महिला सशक्तिकरण के लिये आवंटित धनराशि से इसका प्रमाण मिलता है। लाड़ली बहना योजना के माध्यम से मातृ शक्ति को संबल देने के साथ युवा प्रतिभा को धरातल पर उतारने के लिये शिक्षा और खेल कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने के प्रयास भी किये गए हैं। प्रदेश सरकार ने अन्नदाताओं के लिये भी अपने खजाने खोल दिये हैं। माना जाता है कि किसान की समृद्धि से ही प्रदेश खुशहाल होता है। डॉ. मोहन यादव की गिनती मध्यप्रदेश के उन बिरले नेताओं में होती है जो लीक से हटकर काम करने के लिए जाने जाते हैं। दो साल से कुछ अधिक के कार्यकाल में वे अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों से आगे निकल गए हैं। सबसे खास बात यह है कि उन्हंंे नेताओं की तरह ढकोसला करना नहीं आता है, एकदम सहज और सरल उनकी व्यवहारिकता मध्यप्रदेश से लेकर दिल्ली तक लोगों को मोह लेती है। कहते हैं ना कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं, कुछ वैसा ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ है। वे दिन-रात मेहनत करते हैं लेकिन स्वयं के साथ प्रदेश की सात करोड़ से अधिक जनता को भी आनंदित करते हैं। 60 वर्ष की उम्र ऐसी है जहां मनुष्य अपने जीवन की नयी पारी शुरू करता है और मोहन यादव की नयी पारी में मध्यप्रदेश अभिभूत होगा क्योंकि उन पर महाकाल की कृपा है और वे सम्राट विक्रमादित्य के अनुयायी हैं। ईएमएस/24/03/2026