लंदन (ईएमएस)। सोशल मीडिया या किसी भी ऐप का एक छोटा सा नोटिफिकेशन भी इंसान के दिमाग को कुछ सेकंड के लिए ‘हाईजैक’ कर सकता है, जिससे काम करने की गति और ध्यान दोनों प्रभावित होते हैं। ताजा अध्ययन की रिपोर्ट में बताया गया है कि स्मार्टफोन नोटिफिकेशन हमारे दिमाग की सीमित संज्ञानात्मक क्षमताओं पर सीधा असर डालते हैं और फोकस को भटका देते हैं। खासतौर पर तब इसका प्रभाव ज्यादा देखा गया, जब यूजर्स को लगता था कि नोटिफिकेशन उनके निजी लक्ष्यों या भावनाओं से जुड़ा हुआ है। रिसर्च के दौरान 180 विश्वविद्यालय के छात्रों पर ‘स्ट्रूप टास्क’ नामक एक कॉग्निटिव टेस्ट किया गया। यह एक मनोवैज्ञानिक परीक्षण है, जो व्यक्ति की फोकस बनाए रखने और विरोधाभासी जानकारी को संभालने की क्षमता को मापता है। इस टेस्ट के दौरान प्रतिभागियों के फोन पर लगातार अंतराल में नोटिफिकेशन भेजे गए। शोधकर्ताओं ने उनके व्यवहारिक और शारीरिक संकेतों जैसे प्रतिक्रिया समय, दिल की धड़कन और आंखों की गतिविधियों का विश्लेषण किया। परिणामों से पता चला कि हर बार नोटिफिकेशन आने पर दिमाग में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण रुकावट आती है, जिसे ‘ट्रांजिएंट स्लोइंग ऑफ इंफॉर्मेशन प्रोसेसिंग’ कहा गया है। आसान शब्दों में कहें तो नोटिफिकेशन मिलने के बाद लगभग 7 सेकंड तक दिमाग की सूचना प्रोसेस करने की गति धीमी हो जाती है। यह असर भले ही अस्थायी होता है, लेकिन इस दौरान व्यक्ति का ध्यान भटक जाता है और काम की गति प्रभावित होती है। स्टडी में यह भी सामने आया कि केवल ‘स्क्रीन-ऑन टाइम’ यह समझने का सही पैमाना नहीं है कि कोई व्यक्ति कितना विचलित हो रहा है। असल में यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि दिनभर में कितनी बार फोन चेक किया जाता है और कितने नोटिफिकेशन प्राप्त होते हैं। बार-बार फोन अनलॉक करना और नोटिफिकेशन देखना, लंबे समय तक बिना रुकावट काम करने की क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर देता है। सुदामा/ईएमएस 24 मार्च 2026