अबुजा (ईएमएस)। पश्चिमी अफ्रीका के नाइजीरिया की एदो और एसान जनजातियों में निभाई जाने वाली परंपरा लोगों को अचंभित कर देती है। सालों से चल आ रही इस परंपरा के अंतर्गत दुल्हन को विदाई से पहले अपने ससुर की गोद में बैठना होता है। यह रस्म केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिवार और रिश्तों की गहराई को दर्शाने वाली एक प्रतीकात्मक प्रक्रिया है। इस परंपरा की सबसे खास बात यह है कि इसे सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि कई बार दोहराया जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, दुल्हन को अपने ससुर या कुछ मामलों में दूल्हे की गोद में कम से कम सात और अधिकतम ग्यारह बार बैठना और उठना होता है। इस दौरान समुदाय के बुजुर्ग विशेष मंत्रों और प्रार्थनाओं का उच्चारण करते हैं। उनका उद्देश्य नवविवाहित जोड़े के जीवन में सुख, समृद्धि और बाधारहित भविष्य की कामना करना होता है। पूरी प्रक्रिया को सामूहिक आशीर्वाद का रूप माना जाता है, जिसमें परिवार और समाज की सक्रिय भागीदारी होती है। इस रस्म का महत्व केवल परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा भावनात्मक अर्थ भी जुड़ा हुआ है। ससुर की गोद में बैठने को इस बात का प्रतीक माना जाता है कि दुल्हन अब उस परिवार का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। उसे बहू ही नहीं, बल्कि बेटी के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। यह परिवार के बड़े-बुजुर्गों की स्वीकृति और स्नेह को दर्शाता है। वहीं, बार-बार बैठने और उठने की प्रक्रिया को दुल्हन की मानसिक और शारीरिक तैयारी के रूप में देखा जाता है, जो उसे नए जीवन और जिम्मेदारियों के लिए सक्षम बनाती है। रस्म के अंतिम चरण में दूल्हा दुल्हन को गले लगाता है। यह क्षण केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से भी महत्वपूर्ण होता है। इसे इस बात की सार्वजनिक घोषणा माना जाता है कि अब दुल्हन की सुरक्षा और जिम्मेदारी पूरी तरह उसके पति के हाथों में है। इस प्रक्रिया के बाद ही विवाह को समुदाय द्वारा औपचारिक रूप से पूर्ण माना जाता है। सुदामा/ईएमएस 24 मार्च 2026