दुबई,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष अब एक निर्णायक और अधिक भीषण मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। ताजा घटनाक्रम के अनुसार, ईरान के खिलाफ इस युद्ध में अब सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के भी सक्रिय रूप से शामिल होने की तैयारी है। हालांकि, अभी तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन रणनीतिक हलचलों ने युद्ध के और फैलने की आशंका बढ़ा दी है। ईरान द्वारा यूएई समेत कई स्थानों पर किए गए धमाकों के बाद इन देशों के रुख में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक, सऊदी अरब और यूएई ने ईरान के खिलाफ युद्धक तैयारियों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। खबर है कि सऊदी अरब ने किंग फाहद एयर बेस तक अमेरिकी सेना की पहुंच को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐतिहासिक रूप से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि सऊदी अरब लंबे समय से यह कहता आया है कि वह अपनी धरती या एयर बेस का इस्तेमाल अपने पुराने दुश्मन ईरान पर हमले के लिए नहीं होने देगा। वहीं, यूएई ने कथित तौर पर अपने देश में स्थित ईरान के मालिकाना हक वाले एक प्रमुख अस्पताल और क्लब को बंद कर दिया है, जिन्हें तेहरान के लिए सामरिक और कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता था। कुछ रिपोर्टों और वीडियो साक्ष्यों से यह भी संकेत मिले हैं कि ईरान पर हालिया हमलों में इस्तेमाल की गईं मिसाइलें बहरीन से दागी गई थीं। कूटनीतिक मोर्चे पर भी सऊदी अरब ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। सऊदी प्रशासन ने ईरान के सैन्य अटैची और दूतावास के चार कर्मचारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। सऊदी अरब ने ईरान पर अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता के उल्लंघन का आरोप लगाया है, जिससे तेहरान इस क्षेत्र में कूटनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ता दिख रहा है। दूसरी ओर, यूएई ने पुष्टि की है कि उसकी हवाई रक्षा प्रणाली ईरान की ओर से होने वाली लगातार गोलाबारी और मिसाइल हमलों को रोकने में सक्रिय है। इस तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अस्थायी राहत का संकेत दिया है। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के लिए दी गई समयसीमा बढ़ा दी है और घोषणा की है कि अमेरिका पांच दिनों के लिए ईरानी बिजली संयंत्रों पर होने वाले हमलों को टाल रहा है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे के समाधान की संभावना जताई और दावा किया कि अमेरिकी दूत एक प्रभावशाली ईरानी नेता के साथ संपर्क में हैं। उन्होंने स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर के माध्यम से वार्ता जारी रहने की बात कही है, हालांकि ईरानी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर किसी भी बातचीत से इनकार किया है। यह युद्ध अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जिसमें अब तक 2,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और दुनिया के व्यस्ततम हवाई मार्ग असुरक्षित हो गए हैं। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण जलमार्गों पर विवाद नहीं थमा, तो ऊर्जा संकट और अधिक गहरा सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस/24मार्च2026