लेख
24-Mar-2026
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- एआई कौशल,नागरिक भागीदारी और सुलभ प्रसारण से बदलता भारत का डिजिटल भविष्य वैश्विक क्षितिज पर भारत का डिजिटल परिदृश्य आज जिस तीव्र गति से बदल रहा है,वह केवल तकनीकी प्रगति का शुभ संकेत दी नहीं,बल्कि एक व्यापक सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन का परिचायक भी है। इस क्रान्तिकारी परिवर्तन के केंद्र में वह सोच है,जो तकनीक को कुछ विशेष वर्गों तक सीमित न रखकर उसे आम जन तक पहुँचाने की वकालत करती है। इसी दृष्टि को साकार करते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा आरंभ की गई तीन नई पहलें एक नए भारत की डिजिटल आकांक्षाओं को आकार देती दिखाई देती हैं। आज के कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार का उद्देश्य तकनीक को सुलभ,सस्ता और सर्वसुलभ बनाना है,ताकि देश का हर नागरिक डिजिटल क्रांति का भागीदार बन सके। उन्होंने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच को दोहराया,जिसमें तकनीक को लोकतांत्रिक बनाने पर विशेष बल दिया गया है। उनके अनुसार,इन पहलों के माध्यम से न केवल तकनीक की पहुँच बढ़ेगी,बल्कि यह आम लोगों के जीवन को सरल और सशक्त भी बनाएगी। मंत्री ने एमवाईडब्लूएवीईएस प्लेटफॉर्म को एक ऐसे सशक्त मंच के रूप में रेखांकित किया,जहाँ देश का हर नागरिक अपनी रचनात्मकता को अभिव्यक्त कर सकता है। उन्होंने अपने उदगार में उल्लेख किया कि आज का भारत केवल कंटेंट का उपभोक्ता नहीं रहना चाहता,बल्कि वह कंटेंट निर्माण में भी वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने रचनाकारों से आह्वान किया कि वे अपने क्षेत्र, संस्कृति और परंपराओं की कहानियों को इन मँचों के माध्यम से दुनिया तक पहुँचाएँ,जिससे भारत की विविधता और समृद्धि को एक नई पहचान मिल सके। राष्ट्रीय ए आई स्किलिंग पहल पर बोलते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह कार्यक्रम आनेवाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आज लगभग 15 हजार युवाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार किया जाएगा। उनके शब्दों में, “यह पहल युवाओं को केवल कौशल ही नहीं देगी,बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के योग्य बनाएगी। ” यह कथन इस बात का संकेत है कि सरकार एआई को केवल एक तकनीक नहीं,बल्कि एक अवसर के रूप में देख रही है। आज के इस कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू ने भी इन पहलों की व्यापकता और प्रभाव को रेखांकित करते हुए कहा कि यह तीनों पहलें एक साझा नीति दिशा को प्रतिबिंबित करती हैं। उन्होंने अपने उद्गार में स्पष्ट किया कि पहली पहल लोगों को सक्षम बनाएगी,दूसरी उन्हें नए अवसर प्रदान करेगी और तीसरी यह सुनिश्चित करेगी कि कंटेंट की पहुँच समाज के अंतिम व्यक्ति तक हो। उनके अनुसार,यह केवल योजनाएँ नहीं हैं,बल्कि एक मजबूत और समावेशी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में ठोस कदम हैं। यदि इन उद्गारों को व्यापक संदर्भ में देखा जाए,तो यह स्पष्ट होता है कि सरकार की सोच बहुस्तरीय है। एक ओर जहाँ कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को तैयार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर उन्हें अभिव्यक्ति और अवसर के मंच भी प्रदान किए जा रहे हैं। साथ ही,तकनीकी अवरोधों को कम करके यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इन अवसरों का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे। इंडियन इंस्चूयूट क्रियेटेवी ट्रेकनालाँजी के माध्यम से संचालित राष्ट्रीय एआई स्किलिंग पहल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। गूगल और यूट्यूब के सहयोग से तैयार यह कार्यक्रम न केवल तकनीकी ज्ञान प्रदान करेगा, बल्कि रचनात्मक उद्योगों के लिए आवश्यक व्यावहारिक कौशल भी विकसित करेगा। इससे भारत के युवा वैश्विक डिजिटल कंटेंट बाजार में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे। दूसरी ओर, एमवाईडब्लुएवीईएस प्लेटफॉर्म उस बदलते भारत का प्रतीक है,जहाँ हर व्यक्ति अपनी आवाज़ को पहचान दिलाना चाहता है। यह मंच केवल कंटेंट निर्माण का माध्यम नहीं,बल्कि एक सामाजिक- सांस्कृतिक संवाद का सेतु भी है। इसके माध्यम से देश के कोने-कोने से उभरती कहानियाँ, विचार और रचनात्मक अभि व्यक्तियाँ एक साझा मंच पर आ सकेंगी। तीसरी पहल,डीडी फ्री डिश के लिए इन-बिल्ट सैटेलाइट ट्यूनर और उन्नत प्रोग्राम गाइड की सुविधा, सीधे तौर पर आम नागरिक के जीवन को सरल बनाने का प्रयास है। अब बिना सेट-टॉप बॉक्स के टेलीविजन देख पाना न केवल लागत को कम करेगा,बल्कि तकनीक के उपयोग को भी सहज बनाएगा। यह पहल विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहाँ संसाधनों की कमी के कारण लोग अब तक बेहतर प्रसारण सुविधाओं से वंचित थे। इन सभी प्रयासों के केंद्र में प्रसार भारती की भूमिका भी उल्लेखनीय है,जो सार्वजनिक प्रसारण को आधुनिक और सुलभ बनाने में निरंतर प्रयासरत है। यह स्पष्ट है कि सरकार केवल नई योजनाएँ लागू करने तक सीमित नहीं है,बल्कि वह एक ऐसे डिजिटल भविष्य का निर्माण कर रही है,जहाँ अवसर, अभिव्यक्ति और सूचना - तीनों का संतुलित विकास संभव हो। अंततः यह कहा जा सकता है कि आज व्यक्त किए गए केन्द्रीय सुचना प्रसारण मंत्री और सचिव के उद्गार केवल औपचारिक वक्तव्य नहीं हैं,बल्कि वे उस दिशा का संकेत हैं,जिसमें भारत आगे बढ़ रहा है। यह दिशा है-सशक्त नागरिक,सुलभ तकनीक और समावेशी विकास की। यदि इन पहलों को प्रभावी रूप से लागू किया गया,तो वह दिन दूर नहीं जब भारत न केवल डिजिटल दुनिया का उपभोक्ता होगा,बल्कि उसका नेतृत्व भी करेगा। (स्वतंत्र पत्रकार व स्तम्भकार) ईएमएस / 24 मार्च 26