* मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की उपस्थिति में 20 हाई-ट्रांजेक्शन सेवाओं का ऑनलाइन सरलीकरण घोषित * पीएम मोदी के ‘विकसित भारत’ विजन को गति-अब आय, जाति प्रमाणपत्र और राशन कार्ड जैसी सेवाएँ घर बैठे उपलब्ध गांधीनगर (ईएमएस)| मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की गरिमामय उपस्थिति में मंगलवार को गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में राज्य के प्रशासन को अधिक आधुनिक तथा नागरिक-केन्द्रित बनाने के उद्देश्य के साथ ‘सुगम डिजिटल गुजरात’ पहल का विधिवत् प्रारंभ कराया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘विकसित भारत’ संकल्प को साकार करने तथा गुजरात के नागरिकों को सरकारी सेवाएँ उंगलियों पर उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक क्रांतिकारी कदम है। इस कार्यक्रम के दौरान गुजरात प्रशासनिक सुधार आयोग (जीएआरसी) की पाँचवीं रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर राज्य के 5 प्रमुख विभागों की 20 हाईट्रांजेक्शन सेवाओं का ऑनलाइन सरलीकरण घोषित किया गया था। इस पहल द्वारा अब आय-जाति के प्रमाणपत्र, राशन कार्ड तथा शपथपत्र जैसी बुनियादी सेवाएँ ‘फेसलेस, कैशलेस और पेपरलेस’ बनेंगी। मुख्यमंत्री ने ‘सुगम डिजिटल गुजरात’ अनावरण कार्यक्रम अंतर्गत कहा कि हम कई कार्यक्रम किया करते हैं और कार्यक्रम एक ऐसा माध्यम है, जिसके द्वारा सरकार जो कार्य करती है, वे लोगों तक पहुँचते हैं। इतना ही नहीं; सरकार का हमेशा यह प्रयास होता है कि जो कार्य किया गया है, उसमें कमी न रह जाए और प्रेस के माध्यम से वह जानकारी घर-घर पहुँचे, तो जो नागरिक सरकारी योजनाओं के पात्र हैं, वे उसका पूरा लाभ ले सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2002 में ‘स्वागत ऑनलाइन’ कार्यक्रम शुरू कर टेक्नोलॉजी के उपयोग को सदैव प्राथमिकता दी है। उसी प्राथमिकता के आधार पर आज हम बहुत अच्छा परिणाम प्राप्त कर रहे हैं और हम लगभग 20 नई सेवाएँ ‘लाइन’ से ‘ऑनलाइन’ करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को घर बैठे सुविधा मिले; इसके लिए फेसलेस, कैशलेस और पेपरलेस सेवाएँ प्रदान करने के लिए गुजरात सरकार प्रयासरत है। इस डिजिटल प्रक्रिया में यदि नागरिकों को कहीं भी दिक्कत महसूस हो, तो उसके निवारण को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है। भूपेंद्र पटेल ने ग्रामीण जनों के सबसे पहले पटवारी या विलेज कम्प्यूटर एंटरप्रेन्योर (वीसीई) के साथ ही संपर्क में आने का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी सेवाएँ ऑनलाइन किस तरह मिलती हैं; उसका हम सभी जितना प्रचार-प्रसार करेंगे, उतना ही जनता को और प्रशासन को लाभ होगा। मुख्यमंत्री ने कहा, “आप जो नौकरी या सेवा कार्य करते हैं, उसका मुख्य उद्देश्य एक ही दिशा में होना चाहिए कि जनता के काम आसान हों। हमारे मन में एक ही लक्ष्य होना चाहिए कि जितनी आसानी से लोगों का काम हो, उतना हमें संतोष मिले। जब जन प्रतिनिधि तथा सरकारी अधिकारी सभी स्तर एक साथ मिलकर एक ही दिशा में काम करते हैं, तब उसका परिणाम अद्भुत आता है। गुजरात में हम सबने देखा है कि कैसी भी स्थिति हो, अगर हमने साथ मिलकर काम किया है, तो उसके सटीक परिणाम मिले हैं।” मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने जोड़ा कि जब प्रधानमंत्री ने डिजिटल पेमेंट की बात की थी, तब कई लोगों को ऐसा लगता था कि यह कैसे संभव होगा, परंतु आज पूरे देश में सर्वाधिक डिजिटल पेमेंट का उपयोग सामान्य नागरिक तथा छोटे से छोटे व्यक्ति कर रहे हैं। इसमें जनता का भी बहुत बड़ा सहयोग मिला है। उन्होंने कहा कि जब सरकार समस्याओं के समाधान के लिए आगे बढ़ रही हो, तब जनता का साथ हमेशा मिलता रहा है। आज 20 सेवाएँ ऑनलाइन की गई हैं और भविष्य में इस क्षेत्र में ध्यान देकर नागरिकों को अधिक सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए सरकार तत्पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अनावृत हो रही इस नई पहल से स्थापित होने वाली व्यवस्था में डेटा डिजिटल होने के कारण नागरिक को हर नई सेवा के लिए बार-बार वही के वही पेपर प्रस्तुत नहीं करने पड़ेंगे। इसके लिए डिजिटल लॉकर की भी शुरुआत हो रही है। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी के इस उपयोग का लाभ जन-जन तक पहुँचे; इसके लिए हम सबको साथ मिलकर काम करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत के लिए विकसित गुजरात’ विजन को साकार करने के लिए हम सबको डिजिटल क्षेत्र में अधिक से अधिक आगे बढ़ना है। यूपीआई का सर्वाधिक उपयोग छोटे फेरीवाले तथा सब्जीवाले जैसे कम पढ़े-लिखे लोग कर रहे हैं। डिजिटल सरलीकरण के जरिये नागरिक सेवाएँ अधिकाधिक आसान बनाई गई हैं। मुख्यमंत्री ने हाल में उत्पन्न हुई वैश्विक स्थिति के विषय में कहा कि आज राज्य में डीजल, पेट्रोल या गैस की कोई भी कमी नहीं है, सब कुछ पर्याप्त मात्रा में मिल रहा है और मिलता रहेगा। सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के कार्य मंत्र के साथ सरकार विकसित गुजरात के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सब साथ हैं, तो किसी को तकलीफ नहीं होगी। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि डिजिटलाइजेशन वर्तमान भारत, वर्तमान गुजरात तथा वर्तमान नेतृत्व की देन है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब नागरिकों एवं सरकार के बीच दूरी कम करने के प्रयास शुरू किए गए थे। नागरिकों को जन हितकारी सुविधाएँ आसानी से मुहैया कराने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि गाँव में सीएचसी, पीएचसी तथा शहरी क्षेत्रों में जन सेवा केन्द्रों के माध्यम से ये सेवाएँ तैजी से मुहैया कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। श्री मोढवाडिया ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात प्रशासनिक सुधार आयोग की रिपोर्ट के अनुसार तमाम नागरिक-केन्द्रित सेवाएँ डिजिटल बनाने की शुरुआत की है। मोढवाडिया ने जोड़ा कि पहले दिल्ली से एक रुपया भेजा जाता, तो 15 या 16 पैसे ही नागरिकों तक पहुँचते; जबकि आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सुदूरवर्ती नागरिकों को सीधे डीबीटी के जरिये पूरी सहायता मिल रही है। इस बार बेमौसम वर्षा प्रभावित किसानों के खाते में एक क्लिक से लगभग 11000 करोड़ रुपए जमा कराए गए थे, जबकि समर्थन मूल्य पर 15000 करोड़ रुपए की फसलें खरीदी गईं। इसके अलावा; 26 हजार करोड़ रुपए एक ही क्लिक से सभी लाभार्थियों के खाते में जमा हो गए। आज शायद यह डिजिटल सिस्टम न होता, तो पूरी राज्य सरकार के पाँच-छह लाख कर्मचारी इन कार्यों में लगाने पड़ते। आज राशन कार्ड पर मिलने वाले अनाज की सेवाएँ, विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति तथा विधवा बहनों की पेंशन जैसी सुविधाएँ डिजिटलाइजेशन होने के कारण आसान, पारदर्शी तथा त्वरित बनी हैं। ये सेवाएँ पूरी तरह डिजिटल नहीं हैं, कुछ दस्तावेज ऑफलाइन प्रस्तुत करने पड़ते हैं। यह पोर्टल कार्यरत होने से नागरिक घर बैठे अधिकांश सेवाओं के लिए फॉर्म स्वयं ही भर सकेंगे। ‘नागरिक देवो भव’ के भाव से वर्तमान सरकार के नेतृत्व में शुरू हुई इन डिजिटल सुविधाओं का योगदान विकसित भारत-2047 में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। मुख्य सचिव मनोज कुमार दास ने कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का आग्रह है कि आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र तथा अन्य प्रमाणपत्रों के लिए सरकारी कार्यालयों में और सरकारी कार्य के लिए आने वाले लोगों की लाइनें खत्म होनी चाहिए। लोगों का काम घर बैठे होना चाहिए। हर वर्ष अस्सी लाख लोग कतार में खड़े रहें; यह उचित नहीं है। आज टेक्नोलॉजी के माध्यम से राजस्व, स्वास्थ्य तथा ऊर्जा सहित सभी विभाग अच्छा कार्य कर रहे हैं। ‘सुगम डिजिटल गुजरात’ की विशेषता के बारे में मुख्य सचिव ने कहा कि लोगों के काम घर बैठे होंगे। सरकारी ऑफिस में नहीं जाना पड़ेगा। नागरिकों को फोन में, व्हॉट्सएप पर सब मिलेगा। इसमें बारकोड है तथा आधार कार्ड आधारित ऑथेंटिफिकेशन है। यह सिस्टम इस तरह तैयार और विकसित किया गया है कि अगर एक साथ दस लाख लोग पोर्टल पर आ जाएँ, तो भी समस्या नहीं पैदा होगी। उन्होंने राज्य सरकार के ईज ऑफ लिविंग के लिए प्रतिबद्ध होने का उल्लेख करते हुए नागरिकों से अनुरोध किया कि वे यदि सरकार को कोई नया सिस्टम विकसित करने की जरूरत हो, तो उसे लेकर सुझाव दें। इस अवसर पर सामान्य प्रशासन विभाग (प्रशिक्षण) के प्रधान सचिव हारित शुक्ला ने स्वागत संबोधन में कहा कि समग्र प्रक्रिया के मनोमंथन तथा अध्ययन रिपोर्ट के बाद ये टॉप 20 सर्विसेज नागरिकों की सुविधा के लिए कार्यान्वित की गई हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार डॉ. हसमुख अढिया, राजस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. जयंती रवि, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अपर मुख्य सचिव मोना खंधार, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजीव कुमार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव पी. भारती, राज्य सरकार के उच्चाधिकारी, तहसीलदार, उप तहसीलदार तथा पटवारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सतीश/24 मार्च