राष्ट्रीय
24-Mar-2026


गांधीनगर (ईएमएस)| गुजरात विधानसभा में मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) बिल पेश करते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में देश में कई क्रांतिकारी सुधार हुए हैं और उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गुजरात में यह बिल लाया गया है। हालांकि, इस मुद्दे पर सदन में जोरदार राजनीतिक टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने सरकार पर तीखे हमले किए। कांग्रेस नेता अमित चवड़ा ने आरोप लगाया कि यह बिल सरकार की राजनीतिक मंशा से प्रेरित है और हर चुनाव से पहले ही यूसीसी की याद आती है। उन्होंने कहा कि बिल में सभी धर्मों और वर्गों का समुचित प्रतिनिधित्व नहीं दिखता। विशेष रूप से रंजना देसाई की अध्यक्षता वाली समिति में व्यापक भागीदारी की कमी पर सवाल उठाए गए। अमित चावड़ा ने यह भी कहा कि 17 मार्च को रिपोर्ट प्रस्तुत होने के तुरंत बाद 24 मार्च को बिल लाया जाना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की कि समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि विधायकों और जनता को बिल के आधार और उसमें उठाए गए मुद्दों की जानकारी मिल सके। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कुछ समुदायों को कानून के दायरे से बाहर रखा गया है, जो समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासी समाज की परंपराओं को मान्यता दी जा रही है, तो दलित, रबारी और देवीपूजक समाज के लिए भी समान व्यवस्था होनी चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को समानता का अधिकार है और ऐसे में किसी भी प्रकार का भेदभाव गंभीर चिंता का विषय है। अंत में उन्होंने सरकार पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बिल चुनावी एजेंडा बन चुका है। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि पूर्वोत्तर राज्यों का जिक्र किया गया, लेकिन Manipur को क्यों नजरअंदाज किया गया। इस मुद्दे पर अब विधानसभा में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बहस होने की संभावना है। सतीश/24 मार्च