टोक्यो (ईएमएस)। जापान का शिक्षा मॉडल कई मायनों में बेहद खास माना जाता है। यहां लगभग 10 साल की उम्र यानी चौथी कक्षा तक बच्चों की कोई बड़ी परीक्षा नहीं ली जाती। यहां स्कूलों में शुरुआती कक्षाओं के बच्चों पर न तो भारी किताबों का बोझ डाला जाता है और न ही उन्हें परीक्षाओं के तनाव से गुजरना पड़ता है। शिक्षा व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य शुरुआती वर्षों में बच्चों के दिमाग में केवल जानकारी भरना नहीं, बल्कि उनके चरित्र और व्यवहार का निर्माण करना होता है। भारत जैसे देशों में जहां किंडरगार्टन स्तर से ही बच्चों के बीच अंकों और रैंक की प्रतिस्पर्धा शुरू हो जाती है, वहीं जापान का ‘नो एग्जाम’ मॉडल एक अलग दृष्टिकोण पेश करता है। जापानी स्कूलों में बच्चों को सबसे पहले अच्छा इंसान बनना सिखाया जाता है। पढ़ाई के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और शिष्टाचार पर विशेष जोर दिया जाता है। यही कारण है कि जापान के बच्चों को दुनिया के सबसे अनुशासित और धैर्यवान छात्रों में गिना जाता है। जापान में शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छी नौकरी हासिल करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और सभ्य समाज का निर्माण करना है। वहां माना जाता है कि 10 साल से कम उम्र के बच्चे मानसिक रूप से इतने परिपक्व नहीं होते कि वे परीक्षा के दबाव को सही तरीके से समझ सकें। इसलिए शुरुआती कक्षाओं में उन्हें दूसरों का सम्मान करना, खासकर बुजुर्गों का आदर करना, और जानवरों व प्रकृति के प्रति संवेदनशील होना सिखाया जाता है। जापानी स्कूलों की एक और खास बात यह है कि वहां सफाई के लिए अलग से कर्मचारी नहीं रखे जाते। बच्चे खुद अपनी कक्षा, गलियारों और यहां तक कि टॉयलेट तक साफ करते हैं। इस प्रक्रिया को ‘ओ-सोजी’ कहा जाता है। इससे बच्चों में जिम्मेदारी और श्रम के प्रति सम्मान की भावना विकसित होती है। वे सीखते हैं कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और अपने आसपास की सफाई की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए। यही कारण है कि जापान दुनिया के सबसे स्वच्छ और अनुशासित देशों में गिना जाता है। जापान में लंच ब्रेक भी बच्चों के लिए एक तरह का प्रशिक्षण सत्र होता है। छात्र खुद भोजन परोसते हैं, अपने साथियों और शिक्षकों के साथ बैठकर खाना खाते हैं और बाद में सफाई भी करते हैं। उन्हें ‘जीरो वेस्ट’ का सिद्धांत सिखाया जाता है, जिसके तहत खाने की बर्बादी से बचने और संसाधनों का सही उपयोग करने की आदत डाली जाती है। भोजन के बाद बच्चे दूध के कार्टन धोकर रिसाइक्लिंग के लिए तैयार करते हैं, जिससे उनमें टीमवर्क और संसाधनों के महत्व की समझ विकसित होती है। सुदामा/ईएमएस 25 मार्च 2026