नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली हाई कोर्ट ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय की ओर से एक छात्रा के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कारवाई रद कर दी। अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रबंधन की विचारधारा से मेल न खाने वाले शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों या विचारों की अभिव्यक्ति पर रोक नहीं लगा सकता। विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के आधार पर एक छात्रा के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर हमला करने वाले शैक्षिक संस्थानों के प्रबंधन पर तल्ख टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि कोई भी विश्वविद्यालय शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों या विचारों की अभिव्यक्ति पर सिर्फ इसलिए रोक नहीं लगा सकता, क्योंकि छात्रों की ओर से व्यक्त किए गए विचार प्रबंधन की विचारधारा से मेल नहीं खाते हैं। अदालत ने यह टिप्पणी कैंपस में हुए एक विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पर एक छात्रा के खिलाफ डॉ. बी.आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय द्वारा की गई अनुशासनात्मक कारवाई पर की। प्रबंधन की कारवाई के खिलाफ छात्रा की याचिका को स्वीकार करते हुए अदालत ने माना कि विश्वविद्यालय द्वारा दी गई सजा को कानून की नजर में सही नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि शांतिपूर्ण असहमति और चर्चा शैक्षणिक माहौल का एक अभिन्न अंग हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय की भूमिका असहमति के हर रूप को दबाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि ऐसी अभिव्यक्तियों का जवाब दिया जाए और उन पर ध्यान दिया जाए। यह पूरा मामला रैगिंग के आरोपों से उपजे एक विवाद से जुड़ा है। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/25/मार्च/2026