- महुआ की बढ़ी कीमत: बाजार में 45 रुपए किलो तक बिक रहा, सरकारी केन्द्रों से दूरी जशपुर(ईएमएस)। जिले का प्रमुख वनोपज महुआ इन दिनों ग्रामीणों की अतिरिक्त आय का बड़ा जरिया बना हुआ है। बाजार में महुआ 40 से 45 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि वन विभाग ने इस वर्ष इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य 33 रुपए प्रति किलो तय किया है। यही कारण है कि संग्राहक सरकारी खरीदी केन्द्रों के बजाय खुले बाजार में महुआ बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं। वन विभाग ने महुआ खरीदी के लिए जिलेभर में 45 केन्द्र खोले हैं, लेकिन यहां अपेक्षित मात्रा में आवक नहीं हो रही है। बुधवार को लोदाम पतराटोली बाजार में महुआ 42 रुपए प्रति किलो और इससे पहले जशपुर के साप्ताहिक बाजार में 45 रुपए प्रति किलो तक बिका। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार कीमत में 2 से 3 रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले साल शुरुआती सीजन में महुआ 38 रुपए किलो के भाव से शुरू हुआ था और आवक बढ़ने पर 35 रुपए तक गिर गया था। तीन साल पहले जिले में फूड ग्रेड महुआ पर भी काम किया गया था, जिसमें पेड़ों के नीचे जाली लगाकर फूलों को सीधे संग्रहित किया जाता था, जिससे उनकी गुणवत्ता बेहतर रहती थी। हालांकि, इस मॉडल को अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई और वर्तमान में अधिकांश महुआ जमीन से उठाकर ही संग्रहित किया जा रहा है, जिससे उसमें मिट्टी और अन्य अवशेष मिल जाते हैं। लघु वनोपज संघ के एसडीओ शैलेंद्र अम्बस्ठ के अनुसार, सरकार केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करती है और संग्राहक अपनी उपज कहीं भी बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। यदि बाजार भाव गिरता है, तो वे सरकारी केन्द्रों में एमएसपी पर बिक्री कर सकते हैं इस वर्ष बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने महुआ उत्पादन को प्रभावित किया है। चैत्र माह में हुई बारिश के कारण फूल झड़ गए और बचे हुए भी खराब हो रहे हैं, जिससे आवक कम होने की संभावना है। संग्राहकों का कहना है कि फाल्गुन की बारिश लाभकारी होती है, लेकिन इस बार चैत्र की बारिश ने नुकसान पहुंचाया है। व्यापारी शुरुआती सीजन में अधिक मात्रा में महुआ खरीदकर उसे सुखाकर स्टोर कर लेते हैं। ऑफ सीजन में यही महुआ 100 रुपए प्रति किलो तक बिकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में महुआ का उपयोग विशेष रूप से पारंपरिक पेय बनाने और सामाजिक आयोजनों में किया जाता है, जिससे इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है। सत्यप्रकाश(ईएमएस)25 मार्च 2026